दैनिक भास्कर हिंदी: कैग रिपोर्ट का खुलासा : सावनेर ITI के हॉस्टल  में नहीं आया एक भी छात्र,  बेकार गए 1.22 करोड़

March 29th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। नागपुर के सावनेर तहसील के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) के हॉस्टल का इस्तेमाल न होने के कारण 1.22 करोड़ खर्च व्यर्थ चला गया। हॉस्टल में रहने के लिए एक भी विद्यार्थी द्वारा प्रवेश न लिए जाने के कारण राज्य सरकार द्वारा किए गए खर्च का भारी नुकसान हुआ है। विधानमंडल के दोनों सदनों में की गई पेश नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। कैग का कहना है कि ITI प्रबंधन की लापरवाही से हास्टल में छात्र नहीं आए। प्रदेश सरकार के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को आने-जाने में होने वाली असुविधा के मद्देनजर आवास की व्यवस्था के लिए सावनेर ITI में 100 बिस्तर वाला हॉस्टल बनाने का फैसला लिया था। अगस्त 2008 में हॉस्टल बनाने के लिए 1.22 करोड़ रुपए की प्रशासकीय मंजूर दी गई। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अक्टूबर 2014 में हॉस्टल को ITI के प्राचार्य को सौंप दिया गया।

कैग की रिपोर्ट में खुलासा
कैग की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2016 में ITI के दस्तावेजों की पड़ताल की गई तो पता चला कि हॉस्टल में रहने के लिए एक भी विद्यार्थी ने रुचि नहीं दिखाई। परिणाम स्वरूप मार्च 2017 तक हॉस्टल खाली पड़ा रहा। हॉस्टल में बनाई गई 19 खोली और भोजन घर के फर्निचर, खाट और कपाट बिना इस्तेमाल के पड़े रहे। इस बारे में ITI के प्राचार्य ने कैग को जवाब दिया कि मार्च 2016 से मार्च 2017 के बीच अग्रिम जमा कराए जाने वाली राशि 1 हजार रुपए और हॉस्टल का किराया प्रति वर्ष 240 रुपए से बढ़ाकर 1200 रुपए करने के कारण विद्यार्थी यहां रहने के लिए नहीं आए। हॉस्टल में वार्डन और उपहारगृह (कैंटीन) और भोजन बनाने के लिए कोई व्यक्ति नहीं था।

बस की सुविधा होने के कारण विद्यार्थियों को घर से आकर पढ़ने में सुविधा होती है। कैग ITI के प्राचार्य के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। कारण हॉस्टल में प्रवेश के लिए साल 2014-15 में विद्यार्थियों ने आवेदन दिया था। लेकिन हॉस्टल में वार्डन और सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव प्राचार्य ने भेजा ही नहीं। बाद में अगस्त 2016 में प्रस्ताव भेजा गया तो नियुक्ति नहीं हो पाई। इस तरह से जरूरी कर्मचारियों की नियुक्ति न होने और भोजनालय की सुविधा न होने के कारण हॉस्टल का उपयोग नहीं हो सका। कैग ने मई 2017 में राज्य सरकार से इस बारे में पूछा लेकिन सरकार की तरफ से नवंबर 2017 तक कोई जवाब नहीं आया।