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करतारपुर के लिए नहीं शुरू हुए रजिस्ट्रेशन, 20 डॉलर की शुल्क वसूली पर अड़ा पाक

करतारपुर के लिए नहीं शुरू हुए रजिस्ट्रेशन, 20 डॉलर की शुल्क वसूली पर अड़ा पाक

हाईलाइट

  • करतारपुर जाने वाले श्रद्धालुओं के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन रविवार को शुरू नहीं किया जा सके
  • पाकिस्तान प्रत्येक तीर्थयात्री से 20 डॉलर वसूलना चाहता है
  • भारत ने अब तक इसपर अपनी सहमति नहीं दी है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। करतारपुर साहिब गरुद्वारा जाने वाले श्रद्धालुओं के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन रविवार को शुरू नहीं किया जा सके। दरअसल, पाकिस्तान प्रत्येक तीर्थयात्री से 20 अमेरिकी डॉलर (यानी करीब 1428 रुपये) वसूलना चाहता है, लेकिन भारत ने अब तक इसपर अपनी सहमति नहीं दी है। भारत और पाकिस्तान को तीर्थयात्रा के कुछ अनसुलझे मुद्दों को लेकर शनिवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर करने थे, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ।

इससे पहले लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव गोविंद मोहन ने कहा था, 'गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 20 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है।' मोहन ने कहा था कि 'चार-लेन राजमार्ग और अत्याधुनिक यात्री टर्मिनल का काम अक्टूबर अंत तक पूरा हो जाएगा।' हालांकि, पाकिस्तान में काम की धीमी प्रगति को इंडियन साइड से स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

मोहन ने कहा था कि पाकिस्तान ने निर्माण को टाल दिया है, लेकिन यह आश्वासन दिया है कि वह तय समय में काम पूरा कर लेगा। पाकिस्तान तीर्थयात्रियों को सुविधा केंद्र के किनारे तक ले जाने और उन्हें वापस छोड़ने के लिए जीरो पॉइंट तक परिवहन प्रदान करेगा। यात्री टर्मिनल पर कुल 55 आव्रजन काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं। यहां पर वीजा की कोई आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन तीर्थयात्रियों को अपने पासपोर्ट ले जाने होंगे।

पाकिस्तान गुरु नानक की 550वीं जयंती से तीन दिन पहले 9 नवंबर को भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के लिए पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर खोलेगा। हर दिन भारत से 5,000 सिख तीर्थयात्री जाएंगे। यह कॉरिडोर करतारपुर में दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक श्रीन से जोड़ेगा।

पाकिस्तान सरकार करतारपुर कॉरिडोर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से सुविधा शुल्क वसूलना चाहती है। यह रकम 20 यूएस डॉलर के बराबर हैं। हालांकि भारत सरकार ने इस पर अब तक सहमति नहीं दी है। इससे पहले सरकार ने इस बारे में एक हाई पावर कमेटी बनाई थी।
 

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