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लोकसभा स्पीकर ने स्वीकार किया सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, शुक्रवार को होगी चर्चा

July 18th, 2018 23:25 IST
लोकसभा स्पीकर ने स्वीकार किया सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, शुक्रवार को होगी चर्चा

हाईलाइट

  • संसद का मानसून सत्र आज।
  • सरकार के सामने 67 से ज्यादा बिलों को पास करवाने की चुनौती।
  • विपक्ष करेगा सरकार का घेराव।

डि़जिटल डेस्क, नई दिल्ली। बुधवार को संसद के मॉनसून सत्र का आगाज हो गया। सत्र की शुरुआत विपक्ष के हंगामे के साथ हुई। सदन में विपक्ष ने मॉब लिंचिग को लेकर प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग की। बीजेपी के आत्मविश्वास को चुनौती देने के लिए विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का दांव खेला है। अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार चर्चा के लिए तैयार हो गई है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। लोकसभा में शुक्रवार और राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा होगी।



18 दिनों तक चलने वाले सत्र में सरकार दोनों सदनों में अटके 67 बिलों को पास करने की उम्मीद जता रही है। विपक्ष कई मोर्चों पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारियों में जुटा है। दरअसल, ये मोदी सरकार के कार्यकाल का अंतिम मॉनसून सत्र है, ऐसे में विपक्ष आगामी चुनावों को देखते हुए कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। जिनमें महिला आरक्षण, मॉब लिंचिंग, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत, एससी-एसटी एक्ट में बदलाव, ट्रिपल तलाक, भगोड़ा कानून, जम्मू-कश्मीर, मुस्लिम विवाह संरक्षण बिल विपक्ष की रणनीति में शामिल है। 18 जुलाई से 10 अगस्त तक सत्र चलेगा। इनमें 6 दिन छुट्टी के हैं। सरकार के पास अहम बिल पास कराने के लिए 18 दिन, यानी 198 घंटे हैं। इस दौरान सरकार बिल भी पास कराना है और विपक्ष को भी जवाब देना है। 

LIVE UPDATES

1.45 PM : लोकसभा में शुक्रवार और राज्यसभा में सोमवार को होगी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा


12.17 PM: लोकसभा स्पीकर ने कहा मैं तय करूंगी समय और तारीख 

12.16 PM: लोकसभा स्पीकर ने स्वीकार किया अविश्वास प्रस्ताव

12.14 PM: अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सरकार तैयार 

12.10 PM: लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

12.04 PM: लोकसभा की वेल में आकर टीडीपी सांसदों की नारेबाजी, पटल पर रखे जा रहें हैं पत्र

12.05 PM: लोकसभा में सभी सांसदों मे हिमा दास को गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई दी।

12.04 PM: स्पीकर ने लोकसभा में बताया कि कई सांसदों को के त्याग पत्र मिले हैं जिन्हें स्वीकार किया गया है।

12.03 PM: लोकसभा में स्पीकर ने सदन को बताया कि विभिन्न मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव मिले हैं लेकिन किसी के भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया है।

12.02 PM: राज्यसभा में सभापति ने टीडीपी सांसद से कहा कि आप मुझ पर हुक्म नहीं चला सकते। उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल के बाद प्रश्न काल हो रहा है इसमें बाधा न डालें।

12.01 PM: राज्यसभा की कार्यवाही फिर से शुरू

11.49 AM: लोकसभा में टीडीपी सांसद नारेबाजी कर रहे है, मंत्री सांसदों के प्रश्नों का जवाब दे रहे हैं

11.45 AM : लोकसभा में समाजवादी पार्टी और टीडीपी सांसदों का वेल में हंगामा जारी

11.40 AM : लोकसभा में कांग्रेस सासंद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रखी अविश्वास प्रस्ताव की पेशकश

11.40 AM : राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित। आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेटस देने को लेकर टीडीपी सांसद कर रहे थे हंगामा

11.15 AM : लोकसभा में लगे 'We want justice' के नारे

11.15 AM : लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने मॉब लिंचिंग से देशभर में हुई हत्या का मुद्दा उठाया। विपक्ष प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग कर रहा है।

10.45 AM : सदन पहुंचने से पहले पीएम मोदी ने कहा है कि देश के कई महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा होना जरूरी है। आशा करता हूं कि सभी राजनीतिक दल सदन के समय का पूरा उपयोग करेंगे।

महिलाओं के विषय से जुड़े बिल को लेकर लोकसभा स्पीकर ने भी अपनी ओर से पहल की है। महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने का प्रयास करते हुए सरकार ने महिला आरक्षण, एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला संबंधी विधेयकों को संसद से पारित करने में सहयोग करने की मुख्य विपक्षी दल से अपील की। मंगलवार को कांग्रेस के दफ्तर में विपक्षी दलों की बैठक हुई, जिसमें सरकार को घेरने की तैयारी की गई। इसमें अविश्वास प्रस्ताव पर 12 दलों ने सहमति भी जताई। मॉनसून सत्र के दौरान ही राज्यसभा में उप-सभापति का चुनाव होगा। इसी सत्र में पीजे कुरियन का कार्यकाल पूरा हो रहा है। 

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रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन से न केवल मुस्लिम महिलाओं के साथ असमान व्यवहार हुआ बल्कि उनकी गरिमा से भी समझौता किया गया। राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि वह 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराएं। पत्र में उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक को पारित कराने में सरकार का पूरा सहयोग करेगी।

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रविशंकर प्रसाद ने महिला आरक्षण विधेयक की मियाद खत्म होने को लेकर भी पिछली संप्रग सरकार पर हमला बोला उन्होंने कहा, ‘सरकार पूरी तरह से समझना चाहेगी कि संप्रग सरकार द्वारा तीन सालों तक लोकसभा में बिल क्यों नहीं लाया गया और क्यों इसकी मियाद समाप्त होने दी गई। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में बाधाओं के बावजूद भाजपा और राजग विधेयक के समर्थन में खड़े थे।

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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मॉनसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर कहा कि इन विधेयकों को पारित कराने के अलावा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्ज प्रदान करने के लिए उनकी पार्टी को भाजपा के साथ हाथ मिलाना चाहिए। विधानमंडलों में आरक्षण और निजी कानून आदि उनके मंत्रालय से ही संबंधित हैं। वह राहुल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। राहुल ने इस पत्र में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए विधेयक लाए जाने की बात की थी। 

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सरकार भगोड़ा आपराधिक अध्यादेश, वाणिज्यिक अदालत से जुड़ा अध्यादेश, आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश, होम्योपैथिक केन्द्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश, राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश, दिवालियापन और दिवाला संहिता (संशोधन) अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है। ट्रिपल तलाक विधेयक राज्यसभा में लंबित है। इसे पास कराना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। सोमवार को ही केंद्र इसके संकेत दे चुका है।

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बीते 18 सालों में काम के लिहाज से लोकसभा और राज्यसभा का सत्र बिना परिणाम वाला सबसे खराब सत्र रहा है। लोकसभा में कुल 23% और राज्यसभा में 28% कामकाज हुआ। लगातार हंगामे की वजह से दोनों सदनों के 250 घंटे बर्बाद हो गए। इसमें आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य के दर्जा की मांग, कावेरी जल विवाद, नीरव मोदी और एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मूर्तियां तोड़ने जैसे मुद्दों पर कांग्रेस, टीडीपी और एआईएडीएमके समेत विपक्षी पार्टियों ने हंगामा किया। इस पर संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कांग्रेस ने संसद चलने नहीं दी। इससे पहले 2000 में लोकसभा में प्रोडक्टिविटी 21% और राज्यसभा की 27% रही थी। 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।