दैनिक भास्कर हिंदी: छह महीने में देश के 6,000 रेलवे स्टेशनों पर होगी वाई-फाई की सुविधा : पीयूष गोयल

August 29th, 2018

हाईलाइट

  • पीयूष गोयल ने कहा कि करीब 6,000 रेलवे स्टेशन छह से आठ महीनों में वाई-फाई सक्षम होंगे।
  • पीयूष गोयल FICCI द्वारा आयोजित 'स्मार्ट रेलवे कॉन्क्लेव' को संबोधित कर रहे थे।
  • पीयूष गोयल ने कहा कि गांव में रहने वाले बच्चों और महिलाओं को इससे मदद मिलेगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के दूरदराज हिस्सों में हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की जरूरतों पर बल देते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि करीब 6,000 रेलवे स्टेशन छह से आठ महीनों में वाई-फाई युक्त होंगे। वह मंगलवार को फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा आयोजित 'स्मार्ट रेलवे कॉन्क्लेव' को संबोधित कर रहे थे। इस कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा कि रेलवे अपनी स्मार्ट परियोजना पर काफी ध्यान दे रहा है और इसका लाभ जल्द ही देखने को भी मिलेगा।

डिजिटल टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करने की जरूरत
मीडिया को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, 'मैं मानता हूं कि हमें डिजिटल टेक्नोलॉजी का लाभ उठाना चाहिए। इसके लिए देश के सबसे दूर-दराज इलाकों में भी हमें कनेक्टिविटी का विस्तार करने की जरूरत है। रेलवे इसी कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए एक प्रोग्राम पर काम भी कर रही है। हम इस प्रोग्राम के जरिए उन इलाकों से भी कनेक्ट होना चाहते हैं, जहां फाइबर ऑप्टिक्स की सुविधा नहीं है। हमें आशा है कि अगले छह से आठ महीनों में, हॉल्ट स्टेशनों के अलावा, लगभग सभी 6,000 स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा लगा दी जाएगी।'

गांव में रहने वाले बच्चों और महिलाओं को मिलेगी मदद
गोयल ने वाई-फाई के फायदे बताते हुए कहा कि यह सुविधा न केवल यात्रियों को आसानी से यात्रा करने में मदद करेगी। इसके अलावा लोगों को उस जगह की अतिरिक्त जानकारी हासिल करने में भी सहायता करेगी। उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि लोग, विशेषकर गांव में रहने वाले बच्चे, किसान और महिलाओं को स्टेशन पर लगे वाई-फाई सुविधा के कारण लाभ मिल सकेगा।'

ट्रेनें पहले की तुलना में अब समय पर चल रही हैं
केंद्रीय मंत्री ने जल्द ही सभी ट्रेनों में बायो-वैक्यूम टॉयलेट लगाए जाने की बात भी कही। वहीं ट्रेनों के लेट रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल से अब तक ट्रेनों के समय पर रहने में भारी बढ़ोतरी हुई है। 73-74 प्रतिशत ट्रेनें अब समय पर चलती हैं। इसके साथ ही रेलवे ने स्टेशन मास्टर द्वारा हाथ से लिखी जाने वाली समयसारिणी की व्यवस्था को भी बंद कर दिया है। अब कंम्प्यूटर द्वारा जनरेटेड रिकॉर्ड को ही समयसारिणी के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए ट्रेन के इंजन पर GPS फिट किए जा रहे हैं।

इन खर्चों के लिए दो अरब बचाएगी सरकार
रेलवे के लिए हेल्पलाइन सेवा शुरू करने की अपनी मंत्रालय की योजना के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि यह योजना रेलवे के ध्यान में है पर कुछ टेक्निकल कारणों की वजह से इसमें देरी हो रही है। इसके अलावा गोयल ने रेलवे द्वारा हर साल दो अरब डॉलर बचाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि रेलवे नहीं चाहता इन खर्चों का बोझ यात्रियों पर डाला जाए। इसलिए यह सेविंग वाला कदम उठाया गया है।

बता दें कि जुलाई में, भारतीय रेलवे ने देशभर की पटरियों की मरम्मत का कार्य शुरू किया था। इस दौरान रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रैक की निगरानी, ​​रिलेयिंग और मेंटेनेंस को ध्यान में रखते हुए पांच नई ट्रैक मेंटनेंस मशीनों का इस्तेमाल किया था।