दैनिक भास्कर हिंदी: अब रेलवे देगा ज्यादा साफ और हल्के कंबल

April 4th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ट्रेनों के AC कोच में ट्रेवल करने वाले पैसेंजर्स के लिए अच्छी खबर है। रेलवे यात्रियों को दिए जाने वाले कंबलों की गुणवक्ता सुधार करने जा रही है। रेलवे अब यात्रियों को पहले से ज्यादा मुलायम और साफ कंबल उपलब्ध कराएगा। रेलवे बोर्ड की तरफ से ये बात कही गई है। आपको बता दें कि अभी तक रेलवे ऊनी कंबलों का इस्तेमाल करता था। लेकिन अब रेलवे के कंबलों में ऊन के साथ-साथ नाइलॉन भी होगा। रेलवे ने कंबल के वजन भी तय किया है।

कंबल का वजन 450 ग्राम
रेलवे बोर्ड की ओर से जारी संशोधित ब्योरे में कहा गया है, AC डिब्बों में यात्रियों को दिया जाने वाला कंबल साफ होना चाहिए और ग्रीस, साबुन और अन्य मिश्रण से मुक्त रहना चाहिए जो कंबल को कड़ा या वजनी बना सकता है। इसके अलावा कंबलों की गुणवक्ता सुधार करते हुए कहा गया है कि इसमे 60 फीसदी ऊन और 15 फीसदी नाइलॉन होना चाहिए। कंबल में चारों तरफ साटिन पाइपिंग की भी अनिवार्यता की गई है। इसके अलावा कंबल का वजन 450 ग्राम होना चाहिए। आपको बता दें कि अब तक छोटे आकार वाले कंबल का वजन 2.2 किलोग्राम होता था। नए कंबल इससे कई गुणा ज्यादा हल्के है।

महीने में 2 बार धुलाई
कंबलों की धुलाई को लेकर भी रेलवे बोर्ड ने नया विवरण जारी किया है। इसमे कहा गया है, कंबलों की एक महीने में 2 बार धुलाई होनी चाहिए। हालांकि ये उपलब्ध क्षमता पर निर्भर करेगा। फिलहाल कंबलों को 2 महीनों में एक बार ड्राई क्लीन किया जाता है। इसे देखते हुए इन कंबलों की आयु रेलवे ने 4 साल तय की थी। लेकिन धुलाई की आवृति बढ़ जाने के कारण नए कंबलों की आयु घटाकर 2 साल की गई है। एक साल बाद इसकी समीक्षा भी रेलवे कर सकता है। 

CAG ने लगाई थी फटकार
गौरतलब है कि नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) पिछले साल पैसेंजर्स को गंदी चादर, तकिया और कंबल देने पर रेलवे को फटकार लगा चुका है। CAG ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि रेलवे जो कंबल, चादर और तकिये यात्रियों को देता है वो सालों तक नहीं धुलते। रिपोर्ट में कह गया था, कुछ कंबल और चादरें तो ढाई-तीन साल से नहीं धुली है। कुछ जगहों पर पुरानी चादरों को फाड़कर उनसे तकियों के कवर बना देने की भी बात सामने आई थी।