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एलएसी पर जारी गतिरोध के बीच लेह में अनिश्चितता, घबराहट का माहौल (लेह से विशेष ग्राउंड रिपोर्ट)

June 18th, 2020 18:30 IST
 एलएसी पर जारी गतिरोध के बीच लेह में अनिश्चितता, घबराहट का माहौल (लेह से विशेष ग्राउंड रिपोर्ट)

हाईलाइट

  • एलएसी पर जारी गतिरोध के बीच लेह में अनिश्चितता, घबराहट का माहौल (लेह से विशेष ग्राउंड रिपोर्ट)

लेह, 18 जून (आईएएनएस)। हम गुरुवार को जैसे ही लेह हवाईअड्डे से बाहर निकले, हमने देखा कि एक शहर में एक अजीब-सा सन्नाटा पसरा हुआ है - बाजार बंद हैं और अधिकतर लोग कोरोनावायरस महामारी के कारण सड़कों पर नहीं दिख रहे हैं।

महामारी के साथ ही लोगों के बीच पनपी एक अनिश्चितता का होना भी लाजिमी है, क्योंकि सभी को लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध के बारे में पता है।

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के हमले में सोमवार रात 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। उस समय से ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव काफी हद तक बढ़ गया है।

कैब ड्राइवर तानी ने हमें बताया कि यहां स्थिति गंभीर है। तानी ने दबी सी आवाज में कहा, हालात खराब दिख रहे हैं।

लेह शहर से 10 कि. मी. दूर शांति स्तूप के पास, हम कर्नल सोनम वांगचुक से उनके घर पर मिले। वांगचुक कारगिल युद्ध के एक नायक हैं, जिन्होंने 1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी घुसपैठियों को 18,000 फुट की ऊंचाई से पीछे धकेल दिया था।

उनकी बहादुरी के लिए उन्हें महावीर चक्र से नवाजा गया और अब वह सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

वह कहते हैं कि लद्दाख के लोग सेना के साथ खड़े रहते हैं, लेकिन चीन को ऊंची पहाड़ियों से खदेड़ने के लिए युद्ध की जरूरत है।

उन्होंने कहा, लेह के लोग देशभक्त हैं और वह अपने शरीर व आत्मा के साथ सेना के साथ खड़े हैं।

इस बीच, जमीन पर गुस्सा बढ़ रहा है। लद्दाख बौद्ध संघ के अध्यक्ष पी. टी. कुंगजैंग का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने ऐसा किया है।

उन्होंने कहा, हर साल वे भारतीय क्षेत्र में आते हैं और जमीन पर थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ते जाते हैं। सरकार को एक सख्त संदेश देना चाहिए, जैसा कि पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में हुआ था।

लेह शहर में स्थित नागरिक अस्पताल में शहीद हुए सैनिकों के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद अमर शहीदों का पार्थिव शरीर उनके संबंधित राज्यों में भेजा गया।

लेह में शहीद सैनिकों के शवों पर पुष्पचक्र चढ़ाने का समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान उनके दोस्तों और सहयोगियों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस बीच, भारत और चीन के शीर्ष कमांडर गुरुवार को तनाव की स्थिति को खत्म करने के लिए एक और शीर्ष स्तर की वार्ता कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, बातचीत बहुत आगे तक नहीं बढ़ पाई है, मगर जमीन पर बातचीत के माध्यम जरूर खुले हुए हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।