दैनिक भास्कर हिंदी: राम मंदिर को लेकर विहिप का मन बदला, चुनाव तक राम मंदिर पर रहेगी चुप्पी

February 6th, 2019

हाईलाइट

  • विहिप ने लिया बड़ा फैसला।
  • लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर को लेकर अभियान नहीं करेगा।
  • नहीं चाहते बने कोई राजनीतिक मुद्दा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राम मंदिर का मुद्दा काफी गरमाया हुआ है। राम मंदिर का निर्णय कहीं न कहीं भाजपा सरकार के लिए लोकसभा चुनाव की राह तय करेगा। बीजेपी की ही सहयोगी पार्टियां और हिंदू संगठन राम मंदिर को लेकर उन्हें आंखें दिखा रहे हैं। वहीं राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद का मन थोड़ा बदल गया है। विहिप ने एक बड़ा फैसला लिया है। विश्व हिंदू परिषद लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर को लेकर कोई भी अभियान नहीं चलाएगी। विहिप नहीं चाहता कि राम मंदिर चुनावी मुद्दा बने। 

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महसचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए चल रहे अभियान को लोकसभा चुनाव तक नहीं चलाया जाएगा। हम नहीं चाहते हैं कि यह कोई चुनावी मुद्दा बने। उन्होंने कहा , 'विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। नई सरकार के गठन के बाद इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।'

जैन ने कहा,'हमपर आरोप लगते हैं कि राजनीतिक फायदे के लिए राम मंदिर निर्माण का अभियान चला रहे हैं। ऐसे में इस मुद्दे को राजनीति में नहीं फंसाना चाहते। ये एक पवित्र मुद्दा है। इसे हम राजनीति से दूर रखना चाहते है। इसलिए हमने फैसला लिया है कि हम चार महीने तक कोई आंदोलन नहीं चलाएंगे।' 

राम मंदिर को लेकर अबतक क्या-क्या हुआ -

- 6 दिसंबर 1992 में विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। 
- वर्ष 1998 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने गठबंधन सरकार बनाई।
- जनवरी 2002 में अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए पीएम वाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया। वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिंदू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया। 
- फरवरी 2002 में बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को शामिल नहीं किया।
- फरवरी 2002 में विहिप राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने का ऐलान किया। कई हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या में जुटे। अयोध्या से लौट रहे हिंदू कारसेवकों की गुजरात स्टेशन में साबरमती ट्रेन में आग लगने से मौत हो गई। हादसे में 58 कारसेवक मारे गए। 
- मार्च 2002 को सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी। किसी को भी सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी। 
- जून 2002 को विहिप ने मंदिर निर्माण के लिए विवादित भूमि के हस्तांतरण की मांग उठाई।
- मार्च 2003 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजापाठ की अनुमति मांगी। जिसे ठुकरा दिया गया।
- अप्रैल 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल पर की। खुदाई के बाद सामने आई रिपोर्ट में कहा कि मंदिर के अवशेष मिले हैं। 
- मई 2003 में सीबीआई ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए।
- जनवरी 2005 में लालकृष्ण आडवाणी को अदालत में तलब किया गया।
- जुलाई 2005 में लालकृष्ण आडवाणी बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में रायबरेली की एक अदालत में पेश हुए। अदालत ने आडवाणी के खिलाफ आरोप तय किए।
- अप्रैल 2006 में यूपीए सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष बाबरी मस्जिद को तोड़ना एक षड्यंत्र बताया। 
- जुलाई 2006 में सरकार ने विवादित स्थल पर बने अस्थायी राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटफप्रूफ कांच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। जिसका मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया। 
- जून 2009 में बाबरी मस्जिद के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 सालों बाग अपनी रिपोर्ट पीएम मनमोहन सिंह को सौंपी।
- मई 2010 में बाबरी मस्जिद मामले में आडवाणी और अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।
- जुलाई 2010 में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी हुई।
- सितंबर 2010 में अदालत ने अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फैसला सुनाने की घोषण की।
- 17 सितंबर 2010 को कोर्ट ने फैसला टालने की अर्जी खारिज कर दी।
- 30 सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विवादित स्थल को राम जन्मभूमि घोषित किया और तीन भागों में बांट दिया।
- 9 मई 2011 सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
- 26 फरवरी 2016 में राम मंदिर निर्माण को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
- 21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा कि अयोध्या विवाद मामले को आपसी बातचीत से सुलझा लेना चाहिए।
- 8 अगस्त 2017 को शिया सेंट्र वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से कहा कि अयोध्या में विवादित जमीन से कुछ दूरी पर मस्जिद बनाई जा सकती है।
- 14 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी समेत सभी अंतरिम याचिकाओं को खारिज कर दिया।
- 6 अप्रैल 2018 को मुस्लिम पक्षकार की ओर से अधिवक्ता राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि फैसले पर पुनर्विचार के लिए इस मामले को बडी पीठ के पास भेजे।
- 6 जुलाई 2018 को यूपी सरकार ने कहा कि मुस्लिम संगठन सुनवाई में देर कराने की कोशिश कर रहे हैं।
- 13 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोध्या मामले में 20 जुलाई से लगातार सुनवाई होगी।
- 20 जुलाई 2018 को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।
- 27 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर पुनर्विचार से इनकार कर दिया।
- 10 जनवरी 2019 को फैसले के लिए पांच जजों की बेंच का गठन किया गया। जिसकी सुनवाई 29 जनवरी को तय हुई।
- 27 जनवरी को 2019 को फैसला फिर टल गया। 5 जजों के बेंच में शामिल जस्टिस एसए बोबडे ने खुद को अलग कर लिया। 
 

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