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मप्र में ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों का जल सत्याग्रह शुरू

October 25th, 2019 19:00 IST
 मप्र में ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों का जल सत्याग्रह शुरू

हाईलाइट

  • मप्र में ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों का जल सत्याग्रह शुरू

खंडवा, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों का पुनर्वास किए बिना ही बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने के विरोध में धनतेरस के दिन से जल सत्याग्रह शुरू हो गया है। सत्याग्रह खंडवा जिले के कामनखेड़ा गांव में नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल और अन्य नौ लोगों ने शुरू किया।

ओंकारेश्वर बांध में 21 अक्टूबर से पानी भरा जाना शुरू कर दिया गया है, जिससे कई गांवों के रास्ते कट गए हैं और सैकड़ों एकड़ जमीन टापू बन गई है। बांध प्रभावित लगभग 2000 परिवारों का पुनर्वास होना अभी भी बाकी है। पुनर्वास पूरा हुए बिना जलस्तर बढ़ाए जाने से प्रभावित लोगों में आक्रोश है।

जल सत्याग्रह शुरू होने के समय प्रभावितों को संबोधित करते हुए आलोक अग्रवाल ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि बिना पुनर्वास के बांध के डूब में किसी को नहीं लाया जा सकता, मगर ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने से दो हजार परिवारों की संपत्तियां डूब रही हैं, उनका पुनर्वास नहीं किया गया है।

अग्रवाल का दावा है कि 500 परिवारों को पुनर्वास स्थल पर मकान-भूखंड और 400 अन्य परिवारों को मकान-भूखंड के एवज में पैकेज नहीं मिला है। लगभग ढाई सौ परिवारों की 17 सौ एकड़ जमीन जो डूब रही है या टापू बन रही है, उसका अधिग्रहण किया जाना या उसमें रास्ता दिया जाना बाकी है। वनग्राम देगावां के 200 परिवारों की जमीन व गांव का अधिग्रहण किया जाना बाकी है और सैकड़ों अन्य परिवारों के पुनर्वास के अन्य अधिकार बाकी हैं।

राज्य सरकार पर आरोप है कि पुनर्वास पूरा करने के स्थान पर राज्य सरकार द्वारा पानी भरा जा रहा है, घर व खेत डूब रहे हैं, घोघलगांव की बिजली काट दी गई है और उसका रास्ता बंद हो गया है।

ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ाए जाने से कई गांव डूब में आ रहे, इसके विरोध में शुक्रवार से आलोक अग्रवाल के साथ गंगाराम श्रवण, आनंदराम धन्नालाल, लोकेश पूरी, महेशपुरी, राजेंद्र, प्रेमगीर, मोहनभारती, ओमगिरि, कबीरदास, जगदीश लक्ष्मण भाई और पूजन अर्जुन ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है।

आंदोलनकारी कामनखेड़ा गांव में नर्मदा नदी के पानी में खड़े हैं। उनका कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करे। नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 193 मीटर से बढ़ाकर 196़6 मीटर किया जा रहा है। 21 अक्टूबर से जलस्तर बढ़ाने का दौर शुरू हो गया है, वर्तमान में 194 मीटर पर जलस्तर पहुंचने से कई गांव टापू में बदलने लगे हैं और गांव व खेत तक जाने वाले मार्ग भी जलमग्न हो चले हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।