Strait Of Hormuz Crisis: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सिर्फ तेल नहीं ये चीजें भी भारत में होती हैं इंपोर्ट, जानें क्या होगा इसका असर?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में लगातार तनाव जारी है। इसी बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद कर दिया है। इसके बाद से ही कई देशों में इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के कामों में परेशानी हो रही है। दुनिया की 8 अरब की आबादी पूरी तरह से ईंधन और ऊर्जा पर टिकी हुई है। हर रोज करीब 26 अरब पाउंड तेल और गैस जमीन से निकाला जाता है, जिससे दुनिया की रफ्तार ना रुक पाए। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी पूरी तरह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ही निर्भर है। ये एक समुद्री रास्ता ही नहीं है बल्कि भारत के लिए एक बहुत ही अहम चीज है। अगर ये रास्ता युद्ध या किसी अवरोध की वजह से बंद होता है तो भारत में सिर्फ और सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि रसोई गैस से लेकर कई अहम चीजों पर भी असर पड़ेगा।
तेल पर होगा सबसे बड़ा असर
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल इंपोर्ट करता है, जिसमें से 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से भारत में आता है। वहीं, इराक, सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। अगर इस रास्ते पर तनाव बढ़ता है और जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो भारत के रणनीतिक भंडार कुछ ही हफ्तों तक काम आएंगे। इसके बाद से ही देश में परिवहन व्यव्सथा थोड़ी डगमगा सकती है और माल ढोने में भी महंगाई होने लगेगी।
यह भी पढ़े -एनएसई का ब्रोकर्स को निर्देश, वित्त वर्ष 24 या उससे पहले एकत्रित की गई अतिरिक्त एसटीटी वापस करें
रसोई गैस और एलपीजी पर भारी संकट
आम आदमी के किचन तक पहुंचने वाली एलपीजी (LPG) भी भारत की निर्भरता चौंकाने वाली है। भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से मंगाता है। गैस की किल्लत होने पर घरों का बजट तो बिगड़ेगा ही साथ ही व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, भारत अपनी एलएनजी (LNG) यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस का भी 50 से 60 प्रतिशत इंपोर्ट इसी मार्ग से करता है, जो बिजली घरों और उद्योगों को चलाने के लिए अनिवार्य है।
खेती और उर्वरक आपूर्ति की किल्लत
भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां फसलों के उत्पादन के लिए खाद या उर्वरक की लगातार जरूरत होती है और भारत को मिलने वाले कुल उर्वरक का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से ही आता है। वेस्ट एशिया से आने वाली यह खाद अगर समय पर नहीं पहुंची, तो इसका सीधा असर फसल की बुवाई और पैदावार पर पड़ेगा। जिससे अनाज की कीमतें भी बढ़ेंगी।
यह भी पढ़े -मोजाम्बिक में भीषण बाढ़ भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, राहत सामग्री और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी
औद्योगिक कच्चा माल और पेट्रोकेमिकल्स की कमी
कपड़ों से लेकर पेंट और प्लास्टिक की बोतलों तक के प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी इसी रास्ते से आता है। पेट्रोकेमिकल उत्पाद और सिंथेटिक टेक्सटाइल के लिए जरूरी डेरिवेटिव्स की आपूर्ति प्रभावित होने से भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी परेशानी में आ सकता है। कई उद्योगों में काम रुकने की नौबत आ सकती है, जिससे रोजगार और अर्थव्यवस्था के विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
निर्माण सामग्री और कीमती पत्थरों का व्यापार
निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाला चूना पत्थर (Limestone) भी इसी रास्ते से भारत आता है। सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री के लिए इस कच्चे माल की लगातार जरूरत होती है। इसके अलावा, भारत का हीरा उद्योग, जो पूरी दुनिया में बहुत ही मशहूर है। वह भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर है। यूएई और इजरायल से आने वाले रफ डायमंड्स इसी रास्ते से भारत आते हैं।
Created On :   10 March 2026 4:17 PM IST












