Swantatra Bhardwaj News: सीजेपी प्रोटेस्ट के समय मारपीट करने के मामले में गिरफ्तार हुए स्वतंत्र भारद्वाज, जमानत के लिए अदालत में दीं दलीलें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए एक विवाद के मामले में जेल में बंद स्वतंत्र भारद्वाज को राहत नहीं मिली है। दिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत की अर्जी पर भी फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में भारद्वाज पर एक दलित व्यक्ति के पिता के साथ मारपीट करने का आरोप है। उन पर एससी-एसटी कानून के तहत केस दर्ज किया गया है। सुनवाई के समय उनके वकील ने कहा था कि घटना में पहले हमला शिकायत करने वाले व्यक्ति ने ही किया था। वकील ने अदालत में एक वीडियो का भी हवाला दिया है, उनका कहना है कि भारद्वाज की गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक कारण हैं। पुलिस और शिकायतकर्ता ने इन दावों का विरोध किया है।
कैसे शुरू हुआ मामला?
जून में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान स्वतंत्र भारद्वाज और शिकायतकर्ता के बीच झगड़ा हुआ। आरोप है कि भारद्वाज ने एक दलित सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के पिता के साथ मारपीट की थी। उन पर जाति को लेकर गलत शब्द बोलने का आरोप भी लगाया गया था। कुछ समय बाद भारद्वाज ने एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने उस व्यक्ति का सिर फोड़ दिया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया और इसके बाद सीजेपी के नेताओं के साथ चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस के कुछ नेता पुलिस थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। इसके कुछ घंटे बाद पुलिस ने भारद्वाज को बुलंदशहर से पकड़ लिया।
बचाव में वकील ने क्या कहा?
भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने अदालत में कहा कि उनके क्लाइंट ने पहले हमला नहीं किया था। वकील के मुताबिक, शिकायत करने वाले व्यक्ति ने ही भारद्वाज पर हमला किया था। इस घटना का वीडियो भी मौजूद है, वीडियो में भारद्वाज को गिरते हुए देखा जा सकता है। वकील ने गिरफ्तारी के समय पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 27 जून को भारद्वाज को पूछताछ के लिए बुलाया था। वह 29 जून को पुलिस के सामने पहुंचे और पूछताछ के बाद वापस चले गए। उनका कहना था कि बाद में राजनीतिक माहौल बदलने के बाद 4 सितंबर को गिरफ्तारी की गई और वकील ने यह भी बताया कि बाद में भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत एक और एफआईआर दर्ज हुई।
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शिकायतकर्ता और पुलिस का पक्ष
शिकायतकर्ता की वकील स्वाति खन्ना ने अदालत में कहा कि भारद्वाज ने जाति को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि एक वीडियो में भारद्वाज ने खुद मारपीट की बात कही है। वकील ने अदालत को बताया कि भारद्वाज ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी, जिसे हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि पहली एफआईआर में जाति से जुड़े अपशब्दों की बात नहीं थी। बाद में शिकायतकर्ता का दोबारा बयान लिया गया। इसके बाद एससी-एसटी कानून की धाराएं जोड़ी गई थीं।
Created On :   14 Sept 2026 5:46 PM IST












