Indian Army Helicopters: 1971 और कारगिल युद्ध में साथ देने वाले चीता-चेतक हेलीकॉप्टर होंगे रिटायर, सेना खरीदेगी 200 स्वदेशी हेलीकॉप्टर

1971 और कारगिल युद्ध में साथ देने वाले चीता-चेतक हेलीकॉप्टर होंगे रिटायर, सेना खरीदेगी 200 स्वदेशी हेलीकॉप्टर
भारतीय सेना और वायुसेना के 1971 के युद्ध के दौर में चीता और कारगिल के युद्ध में शामिल चेतक हेलीकॉप्टर को सेवा से हटाने की अब पुरी तैयारी हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना और वायुसेना अब पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को सेवा से हटाने की तैयारी कर रही हैं। इनकी जगह दोनों सेनाओं के लिए करीब 200 नए स्वदेशी हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इन हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इनकी अनुमानित लागत करीब 20 हजार करोड़ रुपये है। हल्के बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर (LMRH) की खरीद प्रक्रिया में भारतीय कंपनियों की भागीदारी होगी। वहीं, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी सेना की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है।

400 हेलीकॉप्टरों की जरूरत, पहले चरण में 200 खरीदने की मंजूरी

रक्षा अधिकारियों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारतीय सेना और वायुसेना को कुल 400 हल्के हेलीकॉप्टरों की जरूरत है। पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को अगले साल तक चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाने की योजना है। इसी जरूरत को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने पहले चरण में 200 हेलीकॉप्टर खरीदने की मंजूरी दी है।

अब खरीद प्रक्रिया के अगले चरण में कंपनियों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे और प्रतिस्पर्धी कंपनियों का चयन किया जाएगा। इसके बाद हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए अनुबंध की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। बाकी 200 हेलीकॉप्टरों की खरीद पर भी आगे की योजना के तहत काम किया जाएगा।

HAL के हेलीकॉप्टरों की संख्या बढ़ेगी, निजी कंपनियों को भी मौका

सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अब तक 12 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) तैयार कर चुकी है। खबर के मुताबिक, 187 हेलीकॉप्टरों के ऑर्डर की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इनकी कुल संख्या 199 तक पहुंच सकती है।

वहीं, मंत्रालय की मंजूरी के बाद शुरू होने वाली खरीद प्रक्रिया में निजी भारतीय कंपनियों को भी भाग लेने का अवसर मिलेगा। खरीद अनुबंध को सबसे कम और दूसरे सबसे कम मूल्य वाली पात्र बोलियों के बीच बांटने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। इससे हेलीकॉप्टर निर्माण में एक से अधिक कंपनियों की भागीदारी का रास्ता खुल सकता है।

टाटा-अडानी की तैयारी, विदेशी कंपनियां भी दौड़ में

इस बार हेलीकॉप्टर निर्माण की प्रतिस्पर्धा में सरकारी कंपनी HAL के साथ निजी भारतीय कंपनियां भी उतर सकती हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह यूरोपीय कंपनी एयरबस के साथ साझेदारी में बोली लगाने की तैयारी कर रहा है। वहीं, अडानी समूह इटली की कंपनी लियोनार्डो के साथ मिलकर इस प्रक्रिया में शामिल हो सकता है।

इसके अलावा अमेरिकी कंपनी बेल हेलीकॉप्टर्स भी अपने हेलीकॉप्टर के साथ प्रतिस्पर्धा में उतर सकती है। इस खरीद प्रक्रिया में सरकारी और निजी भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों की भागीदारी से देश में हेलीकॉप्टर निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इस परियोजना से केवल हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनियों को ही नहीं, बल्कि इनके कलपुर्जे तैयार करने, रखरखाव और अन्य सहायक सेवाएं देने वाली छोटी और मध्यम भारतीय कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है।

चीता-चेतक की जगह लेगा HAL का LUH, जानिए इसकी खूबियां

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह लेने के लिए विकसित किया गया है। यह तीन टन श्रेणी का आधुनिक हेलीकॉप्टर है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह कम जगह में उतर सके, निगरानी कर सके और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी उड़ान भर सके।

इस हेलीकॉप्टर की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

- अधिकतम गति: करीब 220 किलोमीटर प्रति घंटा।

- उड़ान की ऊंचाई: करीब 6.5 किलोमीटर तक।

- रेंज: लगभग 350 किलोमीटर।

- पेलोड क्षमता: करीब 500 किलोग्राम।

- कॉकपिट: आधुनिक ग्लास कॉकपिट और मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले से लैस।

इन खूबियों के कारण LUH का इस्तेमाल सैनिकों की आवाजाही, निगरानी और दुर्गम क्षेत्रों में जरूरी सामान पहुंचाने जैसे कामों में किया जा सकता है।

सियाचिन से अरुणाचल तक, दुर्गम सीमाओं पर बढ़ेगी सेना की ताकत

भारत की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हल्के हेलीकॉप्टर सेना और वायुसेना के लिए बेहद अहम हैं। सियाचिन के बर्फीले पहाड़ों से लेकर अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के दुर्गम सीमावर्ती इलाकों तक इनका इस्तेमाल किया जाता है।

इन हेलीकॉप्टरों के जरिए सैनिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने, सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी करने, टोही अभियान चलाने और जरूरी सामान की आपूर्ति करने में मदद मिलती है। इन इलाकों में सड़क संपर्क सीमित होने के साथ मौसम भी तेजी से बदलता है। ऐसे में हल्के हेलीकॉप्टर मुश्किल परिस्थितियों में सेना की पहुंच और संचालन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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