MP News: 'एपस्टीन प्रकरण पर जवाब कब मिलेगा?', हरदीप पुरी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने पर जीतू पटवारी ने BJP को घेरा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के इस फैसले पर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने निशाना साधा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का नाम जेफरी एपस्टीन से जुड़ा होने पर तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस मामले से जुड़े सवालों का जवाब मांगा है।
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एपस्टीन मामले को लेकर जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि हरदीप सिंह पुरी को सत्ता में बनाए रखने के पीछे की विवशता से कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने भाजपा से पूछा कि पुरी के नाम से जुड़े एपस्टीन प्रकरण पर उठे सवालों का जवाब देश को आखिर कब मिलेगा। पटवारी ने इसे मध्यप्रदेश के मतदाताओं के वोट का अपमान बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस फैसले का विरोध करती है।
क्या है एपस्टीन प्रकरण?
दरअसल, अमेरिका के यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में हरदीप सिंह पुरी के साथ ई-मेल संवाद और मुलाकातों का उल्लेख सामने आया था। फरवरी 2026 में पुरी ने स्वीकार किया था कि उनकी एपस्टीन से तीन-चार बार मुलाकात हुई थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि ये मुलाकातें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े उनके काम के दौरान हुई थीं और उनका उद्देश्य पेशेवर संपर्कों के जरिए भारत में निवेश के अवसर तलाशना था।
पुरी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि इन मुलाकातों का एपस्टीन के आपराधिक कृत्यों से कोई संबंध नहीं था।
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मध्यप्रदेश से क्यों बनाया उम्मीदवार?
भाजपा ने एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट के उपचुनाव के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। पुरी का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। हाल ही में भाजपा ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए घोषित उम्मीदवारों में उनका नाम शामिल नहीं किया था।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए 12 नवंबर को मतदान होना है। विधानसभा में भाजपा के बहुमत को देखते हुए पार्टी के उम्मीदवार की जीत की संभावना जताई जा रही है।
कांग्रेस इस फैसले को लेकर भाजपा पर लगातार सवाल उठा रही है। पटवारी का आरोप है कि विवादों के बावजूद पुरी को उम्मीदवार बनाए रखना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, एपस्टीन प्रकरण में मुलाकातों और ई-मेल का उल्लेख अपने आप में किसी आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं है।
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