Bihar News: पटना में दरक रहा BJP का सियासी दुर्ग, शिक्षक MLC सीट पर 30 साल बाद हार

डिजिटल डेस्क,पटना। बिहार की सियासत के केंद्र पटना में भाजपा के मजबूत गढ़ का मिथक धीरे-धीरे टूटता जा रहा है। दशकों से पार्टी का मजबूत वोट बैंक माने जाने वाले राजधानी और आसपास के शहरी वोटर्स के बीच उसकी पकड़ कमजोर होती जा रही है, जिससे पार्टी की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। आपको बता दें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में करीब 30 साल से काबिज बीजेपी के नवल किशोर यादव को आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार सिंह ने 1,057 वोटों से हरा दिया।
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बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के लिए पटना की इन चुनावी चुनौतियों को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के लिए यह केवल दो सीटों का नुकसान नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक जनाधार को बनाए रखने की चुनौती भी है। अब देखना होगा कि भाजपा स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की अपेक्षाओं के बीच तालमेल बैठाकर अपने सियासी दुर्ग को कितना मजबूत कर पाती है।
पटना में भाजपा की पकड़ कमजोर होने के पीछे स्थानीय मुद्दों की अनदेखी और पार्टी के अति-आत्मविश्वास को अहम वजह माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार जलजमाव, बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और स्थानीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर असंतोष ने वोटर्स को विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया। जन सुराज और निर्दलीय चेहरों की मौजूदगी से बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव हुआ। शिक्षक एमएलसी सीट पर हार के पीछे पुरानी पेंशन, मानदेय, सेवा शर्तों और शिक्षा नीति से जुड़ी मांगों को लेकर शिक्षकों का असंतोष माना जा रहा है।
नवल किशोर यादव ने 1996 में पहली बार इस सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद वह लगातार चुनाव जीतते रहे। 2014 में बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर जीतने के बाद 2020 में भी उन्होंने आरजेडी के नारायण यादव को हराया था। इस बार आरजेडी ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को मैदान में उतारा, जिन्होंने बीजेपी का लंबे समय से चला आ रहा वर्चस्व खत्म कर दिया।
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भी भाजपा का करीब तीन दशक पुराना वर्चस्व उपचुनाव में टूटा। 1995 से इस सीट पर पार्टी का दबदबा रहा था। नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा से लेकर नितिन नवीन तक यहां बीजेपी जीतती रही। नितिन नवीन के पार्टी अध्यक्ष बनने और राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद विधायक पद से इस्तीफे के चलते उपचुनाव हुआ। इसमें जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज कर भाजपा के पारंपरिक गढ़ में सेंध लगाई।
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