नागपुर स्नातक सीट: भाजपा-कांग्रेस के बीच मध्यरात्रि तक कांटे की टक्कर, पहले राऊंड में कांग्रेस के वंजारी आगे

भाजपा-कांग्रेस के बीच मध्यरात्रि तक कांटे की टक्कर, पहले राऊंड में कांग्रेस के वंजारी आगे
  • कोटा पूरा करने की संभावना कम
  • पहले राऊंड में कांग्रेस के वंजारी आगे
  • निर्दलीय कराले ने भी दिखायी ताकत

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विधानपरिषद की नागपुर स्नातक सीट के चुनाव के लिए कांग्रेस महाविकास आघाडी के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी व भाजपा महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहले के बीच मुकाबला रोमांचक हो गया है। मध्यरात्रि तक मतगणना का दूसरा राऊंड जारी रहा। मतपत्रों की गिनती के दौरान दोनों उम्मीदवारों के पक्ष में वोटों का गणित बदलता रहा। इससे दोनों राजनीतिक खेमों की बेचैनी बढ़ गई और जीत के दावे भी किए जाने लगे। हालांकि, पहले राउंड में वंजारी को 4 हजार से अधिक वोटों की बढ़त मिलने का दावा किया गया। ऐसे में मुकाबले का फैसला दूसरी पसंद के वोटों से होने की संभावना स्पष्ट हो गई। निर्दलीय उम्मीदवार नीतेश कराले ने भी काफी वोट पाए हैं।

शुक्रवार को सुबह 8 बजे कोराडी रोड स्थित मानकापुर स्टेडियम में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना शुरू हुई। मतगणना केंद्र में केवल उम्मीदवारों और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को प्रवेश दिया गया।

38 उम्मीदवारों के कारण धीमी हुई गिनती

निर्वाचन क्षेत्र में कुल 38 उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मतपत्र काफी बड़े थे। इससे मतगणना की प्रक्रिया लंबी खिंच गई। कुल 1,65,952 मतपत्रों की गिनती के लिए 84 टेबल लगाए गए। इनमें मतदान के दौरान पड़े मतपत्रों के साथ डाक मतपत्र भी शामिल थे। मतपत्रों की लंबाई और उम्मीदवारों की अधिक संख्या के कारण गिनती में समय लगा। पहले राऊंड में 84 हजार व दूसरे राऊंड में करीब 81 हजार वोटों की गिनती हो रही है।

एक मतपेटी में 8 अतिरिक्त वोट मिलने का दावा

मतगणना के दौरान एक मतपेटी से 8 अतिरिक्त मतपत्र निकलने का दावा करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार नीतेश कराले ने आपत्ति जताई। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की। कराले ने कहा कि कम से कम मतपत्रों के जरिए होने वाले चुनाव की प्रक्रिया तो सुरक्षित और पारदर्शी होनी चाहिए।

निर्दलीय उम्मीदवारों ने नारेबाजी कर जताया विरोध

मतगणना व्यवस्था को लेकर निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि चार-पांच उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी प्रत्याशियों के मतपत्रों के लिए अलग-अलग बॉक्स की व्यवस्था नहीं की गई। सभी उम्मीदवार समान हैं, इसके बावजूद मतगणना में भेदभाव किया गया।

निर्दलीय उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके प्रतिनिधियों को मतगणना टेबल तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी। इससे नाराज उम्मीदवारों ने नारेबाजी कर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया और मामले में अदालत जाने की चेतावनी दी। उम्मीदवारों का आरोप था कि बॉक्स की व्यवस्था को लेकर निर्वाचन अधिकारियों से शिकायत करने पहुंचे तो उन्हें धक्के देकर बाहर निकाल दिया गया। विरोध जताने वालों में शरद भांडारकर, संदीप शेंडे, प्रदीप सोमकुंवर, प्रा. सचिन कालबांडे, राजकुमार गेडाम, प्रा. डी.वी. नंदनवार, उत्तमप्रकाश सहारे और धनंजय बोरकर सहित अन्य उम्मीदवार शामिल थे।

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