Nagpur News: 13 साल बाद नागपुर के कोराड़ी तालाब में दिखा दुर्लभ प्रवासी पक्षी!

13 साल बाद नागपुर के कोराड़ी तालाब में दिखा दुर्लभ प्रवासी पक्षी!
  • तिब्बत-मंगोलिया से आने वाले ‘ब्राउन-हेडेड गल’ की वापसी
  • बर्ड वॉचर अमोल आवरकर ने कैमरे में कैद किया दुर्लभ मेहमान
  • तालाब किनारे बढ़ते अतिक्रमण और मानवीय दखल से पक्षियों के आवास पर खतरा

Nagpur News नागपुर के पक्षी प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। शहर के पास स्थित कोराडी तालाब में 13 साल बाद दुर्लभ प्रवासी पक्षी ‘ब्राउन-हेडेड गल’ यानी भूरे सिर वाला गल दिखाई दिया है। इस पक्षी को वाइल्डलाइफ वेलफेयर सोसायटी के बर्ड वॉचर अमोल आवरकर ने अपने कैमरे में कैद किया। कोराडी तालाब में इस दुर्लभ पक्षी की वापसी ने पक्षी प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया है।

तिब्बत से नागपुर तक का सफर

ब्राउन-हेडेड गल लंबी दूरी तय करने वाला प्रवासी पक्षी है। यह मुख्य रूप से तिब्बत और मंगोलिया के क्षेत्रों में पाया जाता है। सर्दियों में यह भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न हिस्सों में प्रवास करता है। कभी-कभी यह मध्य भारत के जलाशयों में भी दिखाई देता है। खास बात यह है कि कोराडी तालाब में इसे आखिरी बार 2012 में देखा गया था। इसके बाद अब इसकी दोबारा मौजूदगी दर्ज की गई है।

प्रवासी पक्षियों के लिए खास ठिकाना है कोराडी तालाब

बर्ड वॉचर अमोल आवरकर के अनुसार, कोराडी तालाब प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना है। यहां रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, गैडवॉल और पाइड कुकू सहित कई प्रजातियों के पक्षी दिखाई देते हैं। ब्राउन-हेडेड गल की वापसी ने भी पक्षी प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ाई है। हालांकि, किसी एक पक्षी की मौजूदगी के आधार पर पूरे जलाशय के पर्यावरण की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

तालाब के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

दुर्लभ पक्षी की वापसी के बीच तालाब के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियां चिंता का विषय हैं। स्थानीय स्तर पर तालाब के किनारे प्लॉटिंग, पेड़ों की कटाई और लोगों की बढ़ती आवाजाही को लेकर चिंता जताई जा रही है। अमोल आवरकर ने आशंका व्यक्त की कि यदि प्राकृतिक आवासों में मानवीय हस्तक्षेप इसी तरह बढ़ता रहा, तो प्रवासी पक्षियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए तालाबों और वेटलैंड्स को सुरक्षित रखना जरूरी है। कोराडी तालाब जैसे जलाशयों का संरक्षण न केवल दुर्लभ पक्षियों के लिए, बल्कि स्थानीय जैव विविधता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।


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