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'न्याय योजना' को लेकर HC का कांग्रेस को नोटिस, पूछा- क्यों न इसे गरीबों को रिश्वत देना समझें


हाईलाइट

  • न्याय योजना को लेकर कांग्रेस को इलाहाबाद हाईकोर्ट का नोटिस
  • कोर्ट ने पूछा क्यों न इसे गरीबों को रिश्वत देना समझें
  • कांग्रेस को 10 दिनों के अंदर जवाब देने को कहा

डिजिटल डेस्क, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय योजना को लेकर कांग्रेस पार्टी को नोटिस जारी किया है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राहुल गांधी से पूछा कि इस वादे को गरीबों को रिश्वत देने जैसा क्यों न माना जाए? कोर्ट ने यह भी कहा है कि क्यों न पार्टी के खिलाफ पाबंदी या दूसरी कोई कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा है। कोर्ट ने कांग्रेस को 10 दिनों के अंदर जवाब देने को कहा है।  

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस तरह की घोषणा रिश्वतखोरी और वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश के समान है। मतदाता को प्रलोभन देना निष्पक्ष मतदान के खिलाफ है। इससे मतदान की प्रक्रिया प्रभावित होती है। कांग्रेस ने घोषणा पत्र में गरीबों को 72 हजार सालाना देने का वायदा कर मतदाताओं को प्रलोभन दिया है। यह आचार संहिता का उल्लंघन है। याचिका में कांग्रेस के विरुद्ध कार्यवाई करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट के वकील मोहित कुमार ने कांग्रेस के घोषणा पत्र में गरीबों को 72 हज़ार रुपये सालाना की आर्थिक मदद देने के आश्वासन वाली न्याय योजना मामले में जनहित याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजेंद्र कुमार की डिविजन बेंच में सुनवाई हुई। याचिका पर अगली सुनवाई 13 मई को होगी। 

बता दें कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों के लिए सालाना 72 हज़ार रुपये उनकी आय सुनिश्चित करने का वादा किया है। कांग्रेस ने इस स्कीम को न्याय योजना का नाम दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सहित पार्टी के तमाम नेता अपने चुनाव प्रचार के दौरान इसका जमकर प्रसार कर रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि यह स्कीम लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित होगी।

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