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पोंगल और बिहू की परंपराएं, अलग तरह से बनाएं जाते हैं परपंपरागत पकवान

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 05th, 2018 18:07 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सूर्य के उत्तरायण होने पर देश के अलग-अलग हिस्सो में अलग-अलग नाम से त्योहार बनाने की परंपरा है। पोंगल, मकर संक्रांति, लोहड़ी, माघ बिहू उत्तर से लेकर दक्षिण तक इनकी धूम देखने मिलती हैं। पोंगल जिसे सूर्य मांगल्यं नाम से भी जाना जाता है। वहीं बिहु को माघ बिहु भी कहा जाता है। बिहु का जश्न एक सप्ताह चलता है, जबकि पोंगल करीब 4 दिनों तक मनाया जाता हैं। यहां हम आपको पोंगल और बिहू के बारे में बताने जा रहे हैं। 

1. पोंगल पर सूर्यदेव को अच्छी फसल और मौसम के लिए धन्यवाद दिया जाता है। इस दिन इंद्रदेव की पूजा का भी विधान है। माघ बिहू असम का एक बड़ा त्योहार है जो किसानों में सर्वाधिक प्रचलित है। यह भी अच्छी फसल के लिए किसानों द्वारा मनाया जाता है।

2. बिहू में भैसों की लड़ाई होती है, जबकि पोंगल के अंतिम दिन बैलों और सांडों को लड़ाया जाता है। ये दोनों ही ही लगभग समान ही होती हैं और बेहद खतरनाक भी।

3. दोनों ही त्योहारों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। पोंगल में सूर्योदय के साथ दूध में उबालने की प्रथा है इसमें उफान का बेहद महत्व है। इसे मिट्टी के बर्तन में परंपरागत रूप से ही उफान आने तक उबाला जाता है।

4. माघ बिहू के लिए मेजी नामक कुटिया बनाई जाती है। इसे बांस व पत्तों से सुंदर आकार देकर बनाया जाता है। लोग कुटिया में परपंरागत भोजन पकाते हैं और एक साथ खाते हैं। मेजी नामक इस कुटिया को अगली सुबह जला दिया जाता है। पोंगल आैर बिहू दोनाें की ही परंपराएं अलग हैं जिसकी वजह से इनकी तैयारियां जनवरी माह के पहले दिन से ही शुरू हाे जाती हैं।

5. पोंगल और बिहू दोनों ही त्योहारों में नाच-गाने की परंपरा भी है। असम और दक्षिण भारत में इस दौरान परंपरागत वेश-भूषा में सजे हुए लोग परंपरागत नृत्य कर देवताओं को यह त्योहार समर्पित करते हैं।

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