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जानिए आखिर क्यों बदलता है हर साल कैलेंडर

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 01st, 2019 23:11 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हम हर साल अपने घरों में नया साल आते ही कैलेंडर बदलते हैं, लेकिल कभी ये नहीं सोचते की आखिर ऐसा क्यों होता है, क्यों हर साल फेस्टिवल की तारीखें बदल जाती हैं। मगर ऐसा क्यों होता है ? आज हम आपको बताते हैं, लेकिन उससे पहले ये जानते हैं कि इस New Year सेलिब्रेशन की शुरुआत कहां से और कैसे हुई। इसके आलावा ये भी जानिए की किस धर्म में किस मौके पर मनाते हैं नया साल। 

ऐसा माना जाता है कि सबसे पहले नया साल बेबीलोन में 21 मार्च को मनाया गया था और कहा जाता है कि न्यू ईयर मनाने की परंपरा लगभग 4000 साल पुरानी है। ये वो समय था जब तानाशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45 वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की थी। ऐसा पहली बार था कि 1 जनवरी को विश्र्व में New Year को सेलिब्रेट किया गया था। कहा जाता है कि कुछ समय बाद इस कैलेंडर में कुछ कमियों के चलते पोप ग्रेगारी ग्रेगेरियन कैलेंडर लेकर आए जो कि जूलियन कैलेंडर का ही रुपातरण है।


कैलेंडर का इतिहास
ऐसा कहा जाता है कि 2000 साल के इतिहास में कैलेंडर में कई सारे संसोधन करने पड़े थे, क्योंकि कैलेंडर का पूरा इतिहास मौसमों के चक्र से जुड़ा हुआ है। इसके पीछे की एक वजह ये भी थी कि हम बहुत धीरे- धीरे पता कर पाए कि हमारी पृथ्वी कितने समय में सूरज का एक परिक्रमा लगा पाती है। इसका ठीक- ठीक, एक साल का हिसाब पता करने में चांद की भी अहम भूमिका रही।  ऐसा माना जाता है कि इसी आधार पर दुनिया के कई देशों ने अपने- अपने कैलेंडर बनाएं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय तमाम कई प्रकार के कैलेंडर अस्तित्व में हैं, जिसमें भारतीय पंचांग भी शामिल है। 

कैलेंडर के प्रकार- हिंदू पंचांग
हिंदू पंचांग के हिसाब से नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से मानी जाती है। जिसे भारतीय मूल में नव संवत कहा जाता है। माना जाता है कि भगवान ब्रहृा ने इसी दिन स्षृटि की रचना आंरभ की थी। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह तिथि अप्रैल में आती है।

इस्लामी पंचांग
इस्लामी पांचाग के अनुसार, मुस्लिम लोगों का नया साल मोहर्रम महीने की पहली तारीख को हिजरी शुरु हो जाता है। ये इस्लामी लेंडर चंद्र पर आधारित होता है।

जैन पंचांग
एक मान्यता के अनुसार भगवान महावीर स्वामी को दीपावली के दिन ही मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसके अगले दिन से ही जैन धर्म के अनुयाईयीं ने नया साल मनाना शुरु कर दिया था। इसे वीर निर्वाण कहते हैं। 

सिख पंचांग
ये तो हम सभी जानते हैं कि पंजाब में नया साल बैसाखी पर्व के रुप में मनाते हैं। सिख नानकशाही के अनुसार, होल्ला मोहल्ला होली के दूसरे दिन नया साल होता है।    

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