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एनसीपी के नेताओं की मांग : कांग्रेस के साथ हो फिफ्टी फिफ्टी की दावेदारी

एनसीपी के नेताओं की मांग : कांग्रेस के साथ हो फिफ्टी फिफ्टी की दावेदारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जिले में भी जोर दिखाना चाहती है। कांग्रेस के साथ गठबंधन के तहत शहर में ग्रामीण क्षेत्र की 12 सीटों में फिफ्टी फिफ्टी की सीट साझेदारी चाहती है। शुक्रवार को मुंबई में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की उपस्थिति में हुई जिले की समीक्षा बैठक में यह मांग प्रमुखता से सामने आयी। कुछ इच्छुक उम्मीदवार ने खड़े होकर कहा कि उन्हें उम्मीदवार बनाया गया तो वे राकांपा को जीत दिलाकर रहेंगे। राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील, वरिष्ठ नेता अजित पवार व अन्य नेताओं ने भी स्थिति की समीक्षा की। शहर में पश्चिम, दक्षिण व मध्य नागपुर विधानसभा क्षेत्र पर प्रमुखता से दावा किया गया। ग्रामीण में हिंगणा, काटोल के अलावा उमरेड क्षेत्र पर दावा किया गया है। संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा में यह भी कहा गया है कि विधानसभा चुनाव में गठबंधन उम्मीदवार के तौर पर राकांपा को लड़ने का मौका नहीं मिलने के कारण नागपुर में संगठन कमजोर हुआ है। शहर राकांपा की ओर से अनिल अहिरकर व ग्रामीण की ओर से बाबा गुजर ने संगठनात्मक स्थिति की जानकारी दी। इच्छुक उम्मीदवारों के अलावा अन्य पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी। 

इच्छुक उम्मीदवारों के नाम

शहर राकांपा की ओर से इच्छुक उम्मीदवारों के नाम की सूची पार्टी अध्यक्ष को सौंपी गई। इच्छुक उम्मीदवारों में उत्तर नागपुर से प्रकाश गजभिये,वर्षा शामकुले, विशाल खांडेकर, मध्य में अनिल अहिरकर , ग्यासदुद्दीन काजी, दक्षिण में दीनानाथ पडोले, अशोक काटले, राजू नागुलवार, ईश्वर बालबुधे, प्रवीण कुंटे, पश्चिम नागपुर में सलिल देशमुख , प्रकाश गजभिये, गंगाप्रसाद ग्वालवंशी, वेदप्रकाश आर्य, ज्वाला धोटे, शैलेष पांडे, बाबाराव गावंडे एवं पूर्व नागपुर में दुनेश्वर पेठे,जानबा मस्के, बजरंगसिंह परिहार शामिल है। 

नागुलवार चर्चा में 

बैठक में शामिल एक पदाधिकारी के अनुसार राजू नागुलवार का दावा सबसे अधिक चर्चा में रहा। नागुलवार ने दक्षिण नागपुर में उम्मीदवार बनने पर खर्च का आंकड़ा भी खुले तौर पर बताया। कांग्रेस की टिकट पर दो बार विधायक रहे दीनानाथ पडोले के दावे को चुनौती देने का प्रयास किया। नागुलवार का कहना था कि पडोले के साथ राकांपा में कितने कार्यकर्ता जुड़े इस बात का भी कभी विश्लेषण किया जाना चाहिए। जीत की संभावना के अलावा उम्मीदवार के लिए दावे के आधार पर भी चर्चा की गई।
 

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