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जैविक खेती को प्रोत्साहित करना सरकार का नीतिगत मामला-हाईकोर्ट

जैविक खेती को प्रोत्साहित करना सरकार का नीतिगत मामला-हाईकोर्ट

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सुरक्षित अनाज के महत्व को कोई दरकिनार नहीं किया जा सकता है लेकिन अनाज की पर्याप्त उपलब्धता भी जरुरी है। मौजूदा समय में जिस तरह से जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है उसे देखते हुए हमे  अनाज की पैदावार बढ़ाने के लिए उचित तरीका व रास्ता अपनाना ही होगा। ताकि सभी लोगों का उदरनिवर्हन आसानी से हो सके। हाईकोर्ट ने यह बात जैविक खेती को प्रोत्साहित किए जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए कही है।

 याचिका में मांग की गई थी सरकार को महाराष्ट्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा कीटनाशकों व उर्वरकों की बिक्री का नियमन करने के लिए कहा जाए। क्योंकि पैदावार बढ़ाने के लिए अत्याधिक कीटनाशकों व उर्वरकों का इस्तेमाल फसलों के लिए ठीक नहीं है। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदराजोग व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन जैविक खेती को प्रोत्साहित  करने की दिशा में कोर्ट निर्देश नहीं दे सकता है। हाईकोर्ट ने इस संदर्भ में यह भी कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है। लिहाजा सरकार ही इस संबंध में निर्णय लेकर न सिर्फ जैविक खेती को प्रोत्साहित कर सकती है बल्कि कीटनाशकों व रसायनिक खादों की बिक्री पर भी निगरानी रख सकती है। अदालत इस मामले में निगरानी नहीं रख सकती है। इसलिए सरकार इस मामले में उचित नीतिगत निर्णय ले। यह बात कहते हुए खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया। 

मेधा बनीं लोकसेवा अधिकार आयोग की विभागीय आयुक्त

महाराष्ट्र राज्य लोकसेवा अधिकार आयोग के कोंकण विभागीय आयुक्त के रूप में मेधा गाडगील ने शपथ ली। राज्य लोकसेवा अधिकार आयोग के आयुक्त स्वाधीन क्षत्रिय ने गाडगील को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। गाडगील प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुई है।

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