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फिरोज के Play Boy के रोल से दुखी थीं इंदिरा

October 30th, 2017 08:56 IST
फिरोज के Play Boy के रोल से दुखी थीं इंदिरा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 31 अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है। इंदिरा गांधी देश की उन राजनेताओं में से हैं, जिनका भारतीय राजनीति में अविस्मरणीय योगदान रहा है। चाहे 1971 का पाकिस्तान युद्ध रहा हो, सन 1975 का आपातकाल रहा हो या फिर 1984 में स्वर्णमंदिर में एकत्र सिख खालिस्तान समर्थकों पर सैन्य कार्रवाई करने की बात हो, उन्होंने सभी फैसले बहादुरी से लिए। उनका राजनीतिक जीवन उतार-चढाव वाला, लेकिन बेहद सफल रहा।

पारिवारिक जीवन उनकी एक कमजोर कड़ी साबित हुई। उन्होंने पारसी मूल के फिरोज शाह से साथ विवाह किया था, लेकिन यह रिश्ता उनके लिए बहुत डिपेंडेबल साबित नहीं हुआ। फिरोज की रसिक मिजाजी की वजह से इंदिरा के साथ उनके रिश्ते कभी सहज नहीं रहे। इंदिरा धीरे-धीरे भावनात्मक रूप से दूर होती गईं। बाद के दिनों में उनके संबंध इतने तल्ख हो गए थे कि दोनों ने अलग-अलग रहना शुरू कर दिया था, हालांकि उनके बीच तलाक कभी नहीं हुआ। इंदिरा विवाह के बाद राजनीति में नहीं आना चाहती थीं। वह लोगों की भीड़भाड़ से दूर एक ऐसी दुनिया बसाना चाहती थीं, जिसमें वह हों, फिरोज हों और उनके बच्चे हों। लेकिन जब फिरोज से उनके संबंध बिगड़ने शुरू हुए तो उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया, जो बाद के दिनों में उनका जुनून बन गया।  

आशिक मिजाज थे फिरोज शाह

एमओ मथाई की किताब रेमनिसन्सिज आफ द नेहरू एज में बताया गया है कि फिरोज गांधी एक आशिक मिजाज व्यक्ति थे। इंदिरा से विवाह के बाद उनका उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री की बेटी से रोमांस शुरू हो गया था। फिरोज जिस लड़की से प्रेम करते थे वह महमूना सुल्तान थीं। फिरोज ने इंदिरा गांधी से तलाक लेने का तय किया। इस बीच इंदिरा और फिरोज के रिश्ते इतने तल्ख हो गए थे कि इंदिरा ने तलाक के लिए अपनी रजामंदी दे दी। लेकिन फिरोज तलाक के साथ-साथ बड़े बेटे राजीव को भी अपने साथ रखना चाहते थे। इस पर इंदिरा गांधी किसी तरह तैयार नहीं थीं।

कई दूसरी महिलाओं से फिरोज के संबंध

कैथरीन फ्रेंक की किताब "इंदिराः द लाइफ ऑफ इंदिरा नेहरू गांधी" में फिरोज शाह को आशिक मिजाज व्यक्ति बताया गया है। किताब के अनुसार फिरोज शाह अलमस्त आदमी थे। उन्होंने अपने आपको खाने-पीने, सेक्स और मौजमस्ती तक ही सीमित कर रखा था। इंदिरा से विवाह के बाद भी उनकी गतिविधियों में कोई बदलाव नहीं आया। विवाह के बाद भी वह दूसरी महिलाओं से फ्लर्ट करते थे। कहा जाता है कि महमूना सुल्तान के अलावा संसद की ग्लैमर गर्ल कही जाने वाली तारकेश्वरी सिन्हा, सांसद सुभद्रा जोशी और कुछ अन्य महिलाओं से भी फिरोज के संबंध रहे हैं।

नेपाली मूल की गर्लफ्रेंड

उनकी एक और नेपाली मूल की गर्लफ्रेंड की उस दौर में खूब चर्चा हुआ करती थी, जो तलाकशुदा थी। इसी वजह से उनका पारिवारिक जीवन तबाह होता गया। फिरोज ने इंदिरा को उनके 16वें जन्मदिन के एक महीना पहले प्रोपोज किया था। इंदिरा ने तब उन्हें झिड़क दिया था। इंदिरा गांधी की मां कमला नेहरू इस रिश्ते के बेहद खिलाफ थीं। कैथरिन फ्रैंक की किताब के अनुसार कमला और फिरोज के बीच अवैध रिश्ते थे। जिनकी उस दौर में इलाहाबाद में खूब चर्चा थी। यही वजह थी कि कमला इंदिरा और फिरोज के विवाह का विरोध कर रही थीं। 1936 में कमला नेहरू की मौत के कुछ समय बाद जवाहरलाल नेहरू इस रिश्ते के लिए राजी हो गए थे। 

फिरोज से विवाह के विरोध में थीं कमला 

फिरोज गांधी की बॉयोग्राफीज में उन्हें मुंबई निवासी पारसी फेरदून जहांगीर घेंदी का बेटा बताया गया है, जो पेशे से मैरीन इंजीनियर थे। एमओ मथाई की किताब में दावा किया गया है कि फिरोज के पिता इलाहाबाद में एक शराब और प्रोविजनल स्टोर चलाते थे। उनकी हैसियत नेहरू के सामने कुछ नहीं थी। किताब के अनुसार फिरोज को उनके युवाकाल में कमला नेहरू की सहायता के लिए वालिंटियर के रूप में रखा गया था। ताकि वह कांग्रेस के काम के लिए इलाहाबाद से बाहर जहां भी जाएं, फिरोज उनके साथ रहें और उनकी सहायता करें।

एमओ मथाई ने अपनी पुस्तक में दावा किया है कि फिरोज ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। इंदिरा जब ब्रिटेन में थीं तो वह उनकी करीबी पाने के लिए लंदन पहुंच गए, जहां उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दाखिला ले लिया। हालांकि वह अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। "रेमनिसन्सिज़ ऑफ द नेहरू एज" के अनुसार, कमला इलाज के लिए जर्मनी के बेडनवीलर में थीं। कमरे में कमला के अलावा नेहरू और एसीएन नांबियार मौजूद थे। इसके दो महीने बाद ही कमला का निधन हो गया। कमला ने कहा, "वह इंदिरा के भविष्य के लिए परेशान हैं।" उन्होंने फिरोज से इंदिरा की शादी का जबरदस्त विरोध किया।

किताब के अनुसार, कमला फिरोज को अस्थिर शख्स मानती थीं। साथ ही फिरोज की पढ़ाई लिखाई भी नहीं थी कि वह पारिवारिक जिम्मेदारी उठा सकें। वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा मैं नहीं चाहती कि मेरी बच्ची अपनी पूरी जिंदगी दुखी रहे। जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें समझाया इस मामले को तुम मुझ पर छोड़ दो। लेकिन कमला नेहरू इससे संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने नांबियार से कहा कि अब तक मैंने इंदिरा को फिरोज से दूर रखा, लेकिन जवाहरलाल नेहरू उसे गाइड नहीं कर पाएंगे। कमला ने आशंका जताई कि उनके निधन के बाद नेहरू इंदिरा को फिरोज से विवाह की अनुमति दे सकते हैं। 

नेहरू भी नहीं चाहते थे विवाह हो

1936 में मां के निधन के बाद इंदिरा बेहद अकेली पड़ गईं थीं। मानसिक तौर पर उन्हें सहारे की जरूरत थी। पिता जवाहर व्यस्त रहते थे। वह उन्हें ज्यादा समय नहीं दे पाते थे। बर्टिल फॉक की किताब "फिरोज गांधीः द फारगाटेन गांधी" में विस्तार से बताया गया है कि कमला नेहरू के निधन के बाद फिरोज ने इंदिरा को संबल दिया। उससे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। यह भी कहा जाता है कि इसी दौरान दोनों ने बिना किसी को बताए चुपचाप विवाह कर लिया। नेहरू और उनका परिवार इस विवाह के सख्त खिलाफ था।

मथाई की किताब के अनुसार पद्मजा नायडु ने नेहरू को समझाया कि अब उनकी बेटी बड़ी हो चुकी है। अगर दोनों विवाह करना चाहते हैं, तो उन्हें रोका नहीं जा सकता। लिहाजा विवाह के लिए राजी हो जाना ही बेहतर विकल्प है। नेहरू ने कोई और विकल्प नहीं देख अंतत: विवाह की अनुमति दे दी। इंदिरा से विवाह के बाद नेहरू ने फिरोज को नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज को प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिटेड जर्नल्स लिमिटेड का मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया। 1951-52 के लोकसभा चुनाव में फिरोज प्रतापगढ़ से सांसद चुने गए। इसके बाद वह सन 1961 में अपने निधन तक सांसद बने रहे। उन्होंने 1956 का चुनाव रायबरेली संसदीय सीट से लड़ा था। मथाई के अनुसार, 1947 में फिरोज विजय लक्ष्मी पंडित की एक बेटी के प्यार में पड़ गए। वह नेशनल हेराल्ड लखनऊ में पत्रकार थी। श्रीमती पंडित को जब यह बात पता चली तो वह वह मास्को से आईं और लड़की को मास्को ले गईं। 


 

कुछ समय बाद ही पड़ गई थी दरार

इंदिरा और फिरोज के रिश्तों में दरार शादी के कुछ समय बाद ही पड़नी शुरू हो गई थी। जिसके बाद वह बच्चों को लेकर अपने पिता के पास आ गईं। इस बीच दोनों के बीच कई बार सुलह समझौते हुए। फिरोज कुछ समय तक प्रधानमंत्री हाउस में इंदिरा के साथ रहे, लेकिन बाद में वह अलग रहने लगे। मथाई ने खुद इंदिरा के साथ अपने रिश्तों की बात लिखी है। लगता है इंदिरा और फिरोज दोनों ही अपनी-अलग जिंदगियां जी रहे थे। कैथरीन फ्रेंक और मथाई दोनों लिखते हैं कि फिरोज अक्सर संसद में सांसदों के बीच मथाई पर नेहरू का दामाद होने का आरोप लगाते थे।

मथाई लिखते हैं 1948 में स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने मुझसे कहा उनकी मौजूदगी में ही फिरोज गांधी ने सेंट्रल हाल में सांसदों के एक ग्रुप से कहा, वह नहीं बल्कि मथाई प्रधानमंत्री के दामाद हैं। फिरोज का फ्रस्टेशन इतना बढ़ गया था कि वह अपनी ही सरकार का विरोध करने लगते थे। इंदिरा गांधी की जीवनी की लेखिका पुपुल जयकर के अनुसार, इंदिरा जब फिरोज के प्रेम में पड़ीं तो वह विवाह के बाद राजनीति की चकाचौंध से दूर जाकर सादगीभरी जिंदगी जीने के सपने देखती थीं। वह एक ऐसा जीवन जीने का सपना देखती थीं, जिसमें वह उनका परिवार ही हो। लेकिन विवाह के बाद जब फिरोज से उनकी दूरियां बढ़ीं तो उन्होंने राजनीति में सक्रियता बढ़ा दी। इससे फिरोज के साथ उनके मतभेद और बढ़ गए।

इंदिरा गांधी जब दूसरी बारी गर्भवती हुईं, तो उन्हें पता लगा कि फिरोज किसी दूसरी महिला के साथ इश्क फरमा रहे हैं। 1958 में फिरोज को दिल का दौरा पड़ने के बाद इंदिरा एक बार फिर उनकी ओर वापस लौटीं, लेकिन जल्दी ही उनके बीच फिर खटास पैदा हो गई। उनके बीच तलाक की बातें शुरू हो गई थीं। यह भी चर्चा थी कि फिरोज दूसरा विवाह कर सकते हैं। इसी बीच 1961 में फिरोज की मौत हो गई।


 

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