Delhi News: SIR को लेकर पूर्व सीईसी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, मतदाता को वोटर लिस्ट से हटाना इसका मकसद

SIR को लेकर पूर्व सीईसी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, मतदाता को वोटर लिस्ट से हटाना इसका मकसद
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने सवाल उठाते हुए कहा 150 बांग्लादेशियों के लिए 8 करोड़ मतदाताओं को परेशान किया गया और इस प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा एसआईआर का मकसद सिर्फ वोटिंग लिस्ट से वोटर्स के नाम हटाना है। इससे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा है। इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया पर असर पड़ा है। आपको बता दें कुरैशी 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी ने अपनी नई किताब 'इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर' के विमोचन से पहले पीटीआई वीडियो को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया में इस बात पर अधिक फोकस किया जा रहा है कि कितने लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएं, जैसे अधिक से अधिक नाम हटाने पर चुनाव आयोग को इनाम मिलने वाला हो। कुरैशी ने आगे कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन ऐसी स्थिति बनाई जा रही है जैसे निर्वाचन आयोग लोगों को यह सुविधा इनाम के रूप में दे रहा हो।

उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि 2002-03 में अंतिम गहन पुनरीक्षण के बाद यह डिसीजन लिया गया था कि अब इन डेप्थ रिव्यू की जरूरत नहीं है, क्योंकि मतदाता सूचियां कंप्यूटरीकृत हो चुकी हैं। बिहार में अवैध प्रवासियों की पहचान के नाम पर शुरू किए गए एसआईआर अभियान का जिक्र करते हुए कुरैशी ने सवाल उठाया कि करीब आठ करोड़ लोगों को परेशान किया गया, लेकिन कितने विदेशी नागरिक पाए गए, इसकी जानकारी चुनाव आयोग ने अब तक नहीं दी है।

आज तक चुनाव आयोग ने यह आंकड़ा नहीं बताया। क्यों? देश जानना चाहता है, हम जानना चाहते हैं। कृपया बताइए कि कितने विदेशी नागरिक मिले?' कुरैशी ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार करीब 500 विदेशी नागरिक पाए गए, जिनमें 150 बांग्लादेशी और 350 नेपाली हिंदू महिलाएं थीं, जो शादी के बाद बिहार आई थीं। पूर्व सीईसी ने आगे कहा 150 बांग्लादेशियों को खोजने के लिए आठ करोड़ लोगों को परेशान किया गया। लाखों वोटर्स के नाम रिमूव कर दिए गए। इससे क्या उद्देश्य पूरा हुआ? क्या यह ठीक है? बिल्कुल नहीं।

उन्होंने आगे कहा पहले छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज किया जाता था। लेकिन अब इस बात पर फोकस है कि कितने लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जाए, जैसे अधिक से अधिक नाम हटाने पर अंक मिलेंगे, इनाम मिलेगा। करोड़ों लोगों को बाहर कर दिया गया है।

Created On :   15 July 2026 4:08 PM IST

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