भारतीय प्रधानमंत्री: 10 भारतीय प्रधान मंत्री और उनके ऐतिहासिक निर्णय जिन्हें हम भूल नहीं सकते

January 13th, 2022

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेता इतिहास रच सकते हैं। अगर महान नेताओं के मेहनत और प्रयास न होते, तो हमारा देश इस मुकाम पर नहीं पहुँचता। हर नेता ने देश के लिए कुछ न कुछ किया है। तो इस आर्टिकल में, हम उन शीर्ष प्रधानमंत्रियों के बारे में बात कर रहे हैं जिन्होंने उदाहरण स्थापित किया है और इतिहास के पन्नों पर अपना नाम हमेशा के लिए चाप दिया है। इन नेताओं के साहसिक फैसले ने देश का चेहरा बदल दिया और हमको दुनिया में यह मुकाम दिलवाया है। आइए एक नजर डालते हैं इन भारतीय प्रधानमंत्रियों पर।

नरेंद्र मोदी
अभी के प्रधान मंत्री, जिनकी जीवन कहानी बहुत अद्भुद है और जो भारत के परिवर्तन के लिए पहले दिन से लगे हुए हैं- नरेंद्र मोदी। वह निश्चित रूप से सैकड़ों भारतीयों की प्रेरणा हैं। यहां उनकी कुछ प्रसिद्ध उपलब्धियां हैं। उन्होंने जरूरतमंद लोगों को मुफ्त दवाई और इलाज प्रदान करने के लिए ‘आयुष्मान भारत’ की स्कीम की शुरुआत की। लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ आंदोलन शुरू किया।

किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया ‘पीएम किसान’।
नरेंद्र मोदी और अन्य भारतीय प्रधानमंत्रियों की उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने के लिए, यहां लेख देखें।

डॉ. मनमोहन सिंह
डॉ मनमोहन सिंह को भारत के सबसे विशेष प्रधानमंत्रियों में से एक कहा जा सकता है। उनके उत्तम वित्तीय ज्ञान और उनका शांत स्वभाव उन्हें एक बहुत बढ़िया नेता बनाता है।
यह उनकी कुछ प्रसिद्ध उपलब्धियां हैं।

उन्होंने नेशनल रूरल हैल्थकारे प्रोग्राम के द्वारा गरीबों को औषधीय और चिकित्सा सेवाएं पहुंचिए।अपने कार्यकाल में भारत को दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाने वाले देश के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी
जिस प्रधान मंत्री को 90 के दशक के बच्चे ज़्यादातर याद रखते हैं, अटल बिहारी वाजपेयी, ने पीएम के रूप में बड़ी उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। यहां उनकी कुछ प्रसिद्ध उपलब्धियां के बारे में हम याद दिलाना चाहते हैं।

राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया और रोडवेज के क्षेत्र में विकास को बढ़ावा दिया  
विदेशी निवेश का मार्ग प्रशस्त किया। एंटी टेररिज्म एक्ट को पारित किया 

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर में हुआ था और उन्होंने राजनीति विज्ञान में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी। वह भारतीय जनता पार्टी के पहले प्रधान मंत्री थे जो अभी सत्ता में हैं। उनका कार्यकाल भारत को आज के युग का राष्ट्र बनाने में उनकी सरकार द्वारा किए गए कई प्रयासों के लिए जाना जाता है। इसमें डिजिटल कनेक्टिविटी में उनके द्वारा लाई गई प्रगति शामिल है।

पीवी नरसिम्हा राव
पीवी नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश के CM रहने क बाद, उनके कठिन परिहराम और लोक प्रियता से, PM की कुर्सी पे बैठते उन्हें देर नहीं लगी। उन्हें फादर ऑफ़ इंडियन एकनिमुक रिफॉर्म्स बी कहा जाता है। उनके समाये में उन्होंने काफी ऐसी उपलब्धियां हासिल की है जो हम नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। उन में से कुछ हम आज बताना चाहते हैं।

भारत के परमाणु क्षेत्र को बढ़ावा दिया। विदेशी निवेश में और अधिक विकास किया।
उनका जन्म तेलंगाना में हुआ था और उन्होंने हिसलोप कॉलेज से कानून में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी।

चंद्रशेखर सिंह
चंद्रशेखर सिंह दफ्तर में बहोत कम समय क लिए ही थे लेकिन इस समाये में ही उन्होंने काफी कुछ ऐसे काम किये जिनका आज बी योगदान भुलाया नहीं जा सकता। PM रहने के अलावा, उन्होंने कई दूसरी भी पदों को संभाला। 

वे राजनीति और सामाजिक परिवर्तन के बारे में अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए जाने जाते हैं। उनका जन्म इब्राहिमपट्टी में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद से राजनीति विज्ञान में परास्नातक पूरा किया।

राजीव गांधी
नेहरू परिवार को आगे लेकर जाने वाले, रजीव गाँधी ने PM के पद को बहोत ही कम उम्र से संभालना शुरू कर दिया। वे उम्र में सबसे छोटे प्रधान मंत्री रहे हैं। वह एक लाइसेंस प्राप्त पायलट भी है। उन्होंने USA और USSR के साथ अच्छे संबंध बनाये। मतदान की आयु सीमा घटाकर 18 की गई।

राजीव गांधी अपने भाई संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत के बाद राजनीति में आए थे। वे ट्रिनिटी कॉलेज से ड्रॉप-आउट थे, जहां उन्होने बी.टेक में प्रवेश लिया था। उनका जन्म मुंबई में हुआ था।

मोरारजी देसाई
मोरारजी देसाई PM की कुर्सी संभालने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति थे। राजनीति में अपने अनुभव और बॉम्बे के पूर्व CM होने के साथ, मीरारजी देसाई ने देश के विकास में बहुत ही प्रशंसनीय बदलाव लाये हैं। 

शांति को बढ़ावा दिया और पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता शुरू की। मीडिया सेंसरशिप को हटाया। उनका जन्म वलसाड में हुआ था और उन्होंने विल्सन कॉलेज, मुंबई से पढ़ाई की था। जनता पार्टी के वे नेता भी थे जिन्होने इंद्रा गांंधी द्वारा शुरू किये गए स्टेट ऑफ़ इमरजेंसी को ख़तम किया। वे आज भी एक प्रसिद्ध स्वतंत्र कार्यकर्ता हैं।

इंदर कुमार गुजराल
इंदर कुमार गुजराल एक ऐसे प्रधान मंत्री थे जिन्होंने बहुत कम समय के लिए पीएम की सीट संभाली थी। उनका कार्यकाल 10 महीने का ही था। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि दफ्तर गुजराल भी एक प्रमुख व्यक्तित्व थे, जिन्होंने विदेश मंत्री, जल संसाधन मंत्री और सूचना और प्रसारण मंत्री सहित कार्यालय संभालने से पहले कई पदों पर कार्य किया था। वह एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था।

इंदर कुमार गुजराल का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से बी कॉम की पढ़ाई पूरी की थी।

गुलजारीलाल नंद
गुलजारीलाल नंदा को 2 बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया। एक बार पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद और दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद। दोनों बार उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा। पहली बार दो महीने और दूसरी बार सिर्फ 13 दिन की अवधि। हालाँकि, इस छोटी अवधि के दौरान भी, उन्होंने लबोरो के लिए बहोत सुधार लाया। 

1962 में भारत-चीन युद्ध और 1965 में भारत-पाक युद्ध जैसे महत्वपूर्ण समय के दौरान उन्होने बहोत ही लगन से दफ्तर संभाला।

पंडित जवाहरलाल नेहरू
इन्हें परिचय की आवश्यकता नहीं है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1947 में स्वतंत्रता के ठीक बाद प्रधान मंत्री का पद संभाला। हालांकि, उनके प्रयासों के कारण, वे लंबे समय तक कार्यालय में रहे। उनका कार्यकाल 17 साल का था।

उनकी उपलब्धियों में शामिल हैं:

उन्होंने हर बच्चे के लिए प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराई
उन्होंने IIT, IIM और AIIMS की स्थापना की
सिंचाई से उन्होंने खेती बाड़ी में बहोत परिवर्तन लाया 

पंडित जवाहरलाल नेहरू बच्चों से प्रेम के लिए जाने जाते हैं। छोटो बच्चे उन्हें प्यार से चाचा नेहरू कहा करते थे। उनका जन्मदिन (जो 14 नवंबर 1889 को था) अभी भी पूरे देश में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। पोशाख जिसमें एक कोट पर लाल गुलाब पेहनते थे अभी भी एक उल्लेखनीय पोशाक है जो सभी बच्चों को प्रेरित करती है जो देश भर में प्यार और बच्चों से लगाव का चिन्ह बन गया है। 

क्रेडिट: Grabon