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मप्र में भाजपा जुटा रही अपने विधायकों के आपराधिक मामलों का ब्योरा

November 07th, 2019 23:07 IST
मप्र में भाजपा जुटा रही अपने विधायकों के आपराधिक मामलों का ब्योरा

हाईलाइट

  • मप्र में भाजपा जुटा रही अपने विधायकों के आपराधिक मामलों का ब्योरा

भोपाल, 7 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में पहले झाबुआ उपचुनाव में मिली हार और उसके बाद पवई से विधायक रहे प्रहलाद लोधी को विशेष अदालत द्वारा दो साल की सजा सुनाए जाने और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा क्षेत्र को शून्य घोषित किए जाने के घटनाक्रम से भाजपा ने सीख ली है। यही कारण है कि पार्टी ने एहतियात के तौर पर विधायकों के आपराधिक मामलों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है, ताकि संभावित किसी मुसीबत या खतरे से बचाव का इंतजाम किया जा सके।

राज्य में लगभग 10 माह पहले भाजपा को 15 साल के शासन के बाद सत्ता से बाहर होना पड़ा। कांग्रेस को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, लेकिन सबसे बड़े दल के तौर पर सामने आई और बाहरी समर्थन से सरकार बनाने में सफल रही। बीते 10 माह में राज्य में दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए, जिसमें से एक छिंदवाड़ा पर तो कांग्रेस ने अपना कब्जा तो बरकरार रखा ही, दूसरी झाबुआ सीट भी भाजपा से छीन ली।

उपचुनाव में झाबुआ में मिली हार से भाजपा के विधायकों का आंकड़ा 109 से खिसककर 108 पर आ गया और पवई के विधायक प्रहलाद लोधी पर गहराए संकट के बाद पार्टी विधायकों की संख्या और कम होने का खतरा मंडराया हुआ है। इसी बीच पार्टी ने विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों का ब्योरा तलब किया है।

राज्य में मौजूदा भाजपा के विधायकों की स्थिति पर नजर दौड़ाई जाए तो एक बात साफ हो जाती है कि राज्य में भाजपा के 30 ऐसे विधायक हैं, जिन पर आपराधिक मामला दर्ज है। इन मामलों में अगर भोपाल की विशेष अदालत सजा का ऐलान करती है तो उनकी विधायकी तक खतरे में पड़ सकती है। इससे कैसे बचा जाए, क्या कानूनी तैयारी की जाए, इसके मद्देनजर भाजपा ने सभी विधायकों का ब्योरा तलब किया है।

पार्टी के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सभी विधायकों को पत्र लिखकर कहा है कि, इस पत्र में विधायकों से आगामी दिसंबर में होने वाले विधानसभा के सत्र में जनता की समस्याओं, किसान समस्या, कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने का परामर्श दिए जाने के साथ ही विधायकों से आपराधिक ब्योरा भी मांगा गया है।

उन्होंने विधायकों से कहा है कि भोपाल की विशेष अदालत में अगर कोई मामला हो तो उसकी अद्यतन स्थिति से अवगत कराएं। प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) की प्रति के साथ अधिवक्ता का विवरण और आवश्यक दस्तावेजों की छायाप्रति अगले सात दिन में उनके कार्यालय को भेजें।

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