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  • If Eknath Shinde's claim turns out to be true, then the government as well as Uddhav Thackeray may have to wash hands with Shiv Sena!

शिवसेना के शिंदे या ठाकरे?: सही साबित हुआ एकनाथ शिंदे का दावा तो परिवार की विरासत भी गंवा सकते हैं उद्धव ठाकरे? सरकार के साथ साथ हाथ से निकल सकती है पार्टी!

June 22nd, 2022

डिजिटल डेस्क,मुंबई।  महाराष्ट्र में राजनीतिक उठापटक के बीच कई तरह कई सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ एकनाथ शिंदे जो हमेशा शिवसेना के खास हुआ करते थे उन्होंने शिवसेना से बगावती रूख अपना लिया है। एकनाथ शिंदे ने कहा है कि उनके साथ 40 विधायक हैं। अगर शिंदे  के दावे पर विश्वास किया जाए तो केवल महाराष्ट्र सरकार पर ही नहीं बल्कि उद्धव के लिए पार्टी बचाए रखने की चुनौती भी होगी। 

बता दें शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के साथ ही 40 विधायक असम के गुवाहाटी पंहुच गए हैं। पहले ये विधायक महाराष्ट्र से गुजरात के सूरत शहर में ठहरे थे फिर गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। विधायकों की संख्याबल की बात की जाए तो एकनाथ शिंदे के साथ उद्धव ठाकरे से ज्यादा विधायक खड़े दिखाई दे रहे हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि शिंदे उद्धव से सरकार के साथ-साथ शिवसेना की गद्दी भी छीन सकते हैं?

 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने 56 सीटों पर जीत दर्ज की थी। शिवसेना के पास अभी 55 विधायक है। एक विधायक का निधन हो चुका है। वहीं शिवसेना से बगावत करने वाले नेता शिंदे का दावा है कि उनके साथ पार्टी  के 40 विधायक हैं। उन्होंने एक बयान में यह भी कहा कि मैं बाल ठाकरे का सच्चा शिवसैनिक हूं, कुर्सी के लिए धोखा नही दूंगा। अब कयास यह भी लगने लगे है कि शिंदे जिस तरह से दावा कर रहे हैं, कि उनके साथ 40 विधायक मौजूद हैं अगर ये सभी शिवसेना के हैं तो उद्धव ठाकरे के सामने काफी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में अगर एकनाथ शिंदे कोई भी कदम उठाते हैं तो दलबदल कानून के तहत भी कोई कार्रवाही उन पर नहीं हो सकती। 

क्या है दलबदल कानून?

बता दें दलबदल कानून को राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार लाई थी। दरअसल 1967 में हुए आम चुनाव के बाद विधायकों के एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाने की वजह से कई राज्यों की सरकार गिर गयी थी। जिसके चलते कांग्रेस सरकार ने 1985 में दल-बदल कानून बनाया और कानून को दसवीं अनुसूची में शामिल किया गया। कानून को बनाने का मुख्य उद्देश्य सांसद और विधायकों के पार्टी बदलने पर रोक लगाई जा सके। कानून से जनप्रतिनिधि की  सदस्यता भी चली जाती हैं।   

हालांकि इस कानून में एक दल से दूसरे दल में जाने वालों के लिए एक छूट भी है। इस कानून से बचने के लिए किसी भी पार्टी के दो तिहाई सांसद या विधायक एक साथ होने चाहिए जो एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हों। यानी ऐसा होने पर कोई भी सांसद या विधायक समूह में दूसरी पार्टी में जाते हैं तो उनमें दल-बदल कानून के तहत सदस्यता खत्म नहीं होगी। महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसी ही स्थिति दिखाई दे रही है। 

शिवसेना के पास विधानसभा में 55 विधायक हैं और दलबदल कानून से बचने के लिए बागी गुट को न्यूनतम 37 विधायकों( 55 में से दो-तिहाई) की आवश्यकता होगी। जबकि एकनाथ शिंदे की बात करें तो वह अपने साथ 40 विधायक होने का दावा कर रहे हैं। अगर शिंदे की बात सही है तो ठाकरे के पास केवल 15 विधायक ही बच रहे हैं। ऐसे में ठाकरे के हाथ से न सिर्फ सरकार बल्कि पार्टी भी निकल सकती है।
 

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