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बलूचिस्तान की सोने की खदानें कब्जाने में पाकिस्तानी सेना की भूमिका

June 10th, 2020 19:01 IST
 बलूचिस्तान की सोने की खदानें कब्जाने में पाकिस्तानी सेना की भूमिका

हाईलाइट

  • बलूचिस्तान की सोने की खदानें कब्जाने में पाकिस्तानी सेना की भूमिका

नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 10 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक आयोग गठित करने की प्रतिबद्धता जताई है, जो इस बात की जांच करेगा कि पाकिस्तान किस प्रकार से एक खनन कंपनी को दिए जाने वाले छह अरब डॉलर के मामले को समाप्त कर सकता है। इस खनन कंपनी ने बलूचिस्तान में सोने और तांबे की खोज की थी, मगर बाद में इसे खनन पट्टा देने से इनकार कर दिया गया था। खदानों पर नियंत्रण स्थापित करने में सेना की गहरी भूमिका इसके पीछे का कारण बताया जा रहा है।

पिछले साल एक बड़े विवाद में वल्र्ड बैंक के इंटरनेशनल सेंटर फॉर सेटलमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट विवाद (आईसीएसआईडी) ने पाकिस्तान को एक बहुराष्ट्रीय खनन दिग्गज टेथियन कॉपर कंपनी (टीसीसी) को अपनी जीडीपी का दो प्रतिशत जुर्माना देने को कहा था।

टीसीसी ने 2006 में बलूचिस्तान में रेको दीक में खदानों का अधिग्रहण किया था, लेकिन कंपनी द्वारा रेको दीक में सोने और तांबे के भंडार की खोज के बाद, पाकिस्तान ने 2011 में खनन पट्टे के आवेदन को ही खारिज कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप टीसीसी ने 8.5 अरब डॉलर के नुकसान का दावा किया था।

जब आईसीएसआईडी ने पिछले साल टीसीसी के पक्ष में विवाद का निपटारा किया तो प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस तरह की वित्तीय आपदा के स्रोतों और कारणों की पहचान करने के लिए एक आयोग गठित करने की घोषणा की। खान पहले से ही अपने पूर्ववर्तियों से विरासत में मिले आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और अब बड़ी मात्रा में लगे जुर्मार्ने ने उनकी चिंताओं को और भी बढ़ा दिया है।

चूंकि यह एक बड़ा जुर्माना है जो कि पाकिस्तान के कुल विदेशी खजाने का 40 प्रतिशत है, इसलिए अब इमरान खान सरकार इस जुर्माने पर रोक लगाए जाने की भरपूर कोशिश कर रही है और सरकार किसी भी तरह से यह जुर्माना हटाने की कई कोशिशें भी कर चुकी है।

सूत्रों ने कहा कि इस्लामाबाद विकल्पों के लिए हाथ-पांव मार रहा है, मगर सरकार में कोई भी उन कारणों की जांच नहीं करेगा कि पाकिस्तान इस विपदा में किस तरह घिरा है।

इस्लामाबाद के सूत्रों ने कहा, ऐसा इसलिए है, क्योंकि पाकिस्तान में हर कोई जानता है कि यह पाकिस्तानी सैन्य-औद्योगिक परिसर है, जिसने सरकारी खजाने और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भी खाली कर दिया है।

पाकिस्तानी विद्वान और अमेरिका में राजदूत रह चुके हुसैन हक्कानी द्वारा लिखी गई हडसन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, यह सेना ही है, जिसने बलूचिस्तान के रेको दीक क्षेत्र से विदेशी कंपनियों की अस्वीकृति की परिकल्पना की थी। पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक समर मुबारकमंद के नेतृत्व में टीसीसी के खिलाफ एक लगातार अभियान चलाया गया, जो कि सेना द्वारा समर्थित था। इसके बाद पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में कंपनी के अनुबंध को रद्द करने का आदेश दिया।

टीसीसी द्वारा बलूचिस्तान में सोने और तांबे की खानों की खोज के बाद, सैन्य-औद्योगिक परिसर ने इसे अपने लिए एक अवसर के तौर पर देखा। सेना ने सुनिश्चित किया कि मुबारकमंद की कंपनी को सोने और तांबे के खनन का ठेका मिले, जबकि रेको दीक की कुछ खदानों को मेटलर्जिकल कॉपोर्रेशन ऑफ चाइना (एमसीसी) में बदल दिया गया।

हालांकि हडसन की रिपोर्ट के अनुसार, न तो चीनी और न ही परमाणु वैज्ञानिक की कंपनी रेको दीक में कोई तांबा या सोना निकाल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अभी भी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के हिस्से के रूप में खनन परियोजना में शामिल हैं।

वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह जुर्माना किसी मुसीबत से कम नहीं है। बता दें कि पिछले साल मध्यस्थता कोर्ट ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया था। मध्यस्थता कोर्ट ने विदेशी कंपनी को खनन पट्टा देने से इनकार करने पर पाकिस्तान पर छह अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था। पाकिस्तान पर यह जुर्माना 2011 में रेको दीक परियोजना के लिए विदेशी कंपनी को गैर-कानूनी रूप से खनन पट्टा देने से इनकार करने पर लगाया गया है, जिससे बचने के लिए पाकिस्तान लगातार हाथ-पैर मार रहा है।

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।