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मप्र की सियासी जंग में सोशल मीडिया बना हथियार

June 08th, 2020 12:16 IST
 मप्र की सियासी जंग में सोशल मीडिया बना हथियार

हाईलाइट

  • मप्र की सियासी जंग में सोशल मीडिया बना हथियार

भोपाल, 7 जून (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए उठाए गए एहतियाती कदमों के चलते सियासी जंग का अंदाज ही बदल गया है और यहां तमाम नेता एक-दूसरे पर हमला करने के लिए सोशल मीडिया को बतौर हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें सभाएं और बैठकें करने का मौका जो नहीं मिल रहा है।

राज्य में बीते लगभग ढाई माह से सियासी गतिविधियां पूरी तरह थमी हुई है, इस अवधि में राज्य में सत्ता परिवर्तन भी हुआ है और सत्ता की कमान कांग्रेस के हाथ से खिसक कर भाजपा के हाथ में आ गई है और वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते हुए सरकार का संचालन कर रहे हैं।

सत्ता में हुए बदलाव के बाद कोरोना संक्रमण बढ़ा, किसानों की गेहूं खरीदी हो रही है, बिजली उपभोक्ताओं को लेकर दी जाने वाली राहत में बड़ा बदलाव हुआ है और उसके बाद बारिश के कारण गेहूं भीग गया है। इन मुद्दों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं में सियासी जंग तेज है और दोनों ही दलों के नेता एक-दूसरे पर सोशल मीडिया को हथियार बनाकर हमले बोल रहे हैं क्योंकि उन्हें वर्तमान में सभाएं और बड़ी बैठकें करने की अनुमति जो नहीं है।

राज्य में पिछले दिनों हुई आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा की सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, शिवराज सरकार में लॉकडाउन में भी दुष्कर्म , गैंगरेप , हत्या , चोरी , लूट की घटनाएं रुक नहीं रही है। मासूम बच्चियां भी सुरक्षित नहीं? जो लोग विपक्ष में इस तरह की घटनाओं पर मासूम बच्चियों को लेकर धरना देते थे, आज सत्ता में आते ही ऐसी घटनाओं पर मौन क्यों है?

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए ट्वीट कर कहा, शिवराज जी, आप समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के भले बड़े-बड़े दावे करे , खूब आंकड़े जारी करे लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। किसान भाइयों को अपनी उपज बेचने के लिये काफी परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है। कई- कई दिन तक भीषण गर्मी व लू में अपनी उपज बेचने के लिये भूखा-प्यासा किसान कई किलोमीटर तक लंबी लाइन में लगा हुआ है, उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है।

वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गेहूं खरीदी के मामले में रिकार्ड बनाए जाने पर किसानों को बधाई देते हुए कहा, यही है हमारे किसान बन्धुओं की पहचान! इन्हीं से है मध्यप्रदेश की आन, बान और शान!

कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया का उपयोग कर किए जा रहे हमलों का मुख्यमंत्री चौहान ने ट्विटर पर अपने ही अंदाज में जवाब दिया है। उन्होंने लिखा है कि, मेरा कांग्रेसी मित्रों से ये आग्रह है कि वो अपने ट्वीट की संख्या बढ़ाए और उचित समय का भी ध्यान रखे। आजकल ये हो रहा है कि वो किसी भी वस्तु को मुद्दा कहते हुए ट्वीट-ट्वीट खेलते रहते है, और मैं पहले ही जनता की हर एक समस्या का संज्ञान ले कर उसके निवारण हेतु काम शुरू कर देता हूं।

चौहान ने कमल नाथ की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला करते हुए कहा, जब उनकी सरकार थी तब भ्रष्टाचार छोड़ अगर उन्होंने जनता के सोशल इशूज का संज्ञान लिया होता तो आज सोशल मीडिया का सहारा नहीं लेना पड़ता! चलिए कोई बात नहीं, वो राजनीति करते रहे और हम काम। जनता तो सब जानती ही है।

सियासी दलों के नेताओं में चल रहे सोशल मीडिया वार पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेता खाली बैठ नहीं सकते, वर्तमान में कोरोना के कारण उन्हें सभाएं करने, कार्यकर्ताओं की बड़ी बैठकें करने का मौका मिल नही रहा है, तो वे मीडिया तक अपनी बात पहुंचाने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग कर रहे तो दूसरी ओर ट्विटर पर ज्यादा ही सक्रिय है। यह ट्विटर का वार राजनीतिक दल और नेता को सियासी तैार पर ज्यादा फायदा पहुंचा पाएगा, इसमें शक है। फिर भी नेताओं को अपनी बात कहने के लिए कोई न कोई प्लेटफार्म तो चाहिए और यही कारण है कि वर्तमान हालात में वे सोशल मीडिया का बेतहर उपयोग करने की कोशिश में लगे हैं।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।