मॉनसून सत्र: स्पीकर की चाय पार्टी में मोदी-शाह संग नजर आईं सिर्फ कनिमोझी, विपक्ष के बहिष्कार के बाद क्या है इसके सियासी मायने?

स्पीकर की चाय पार्टी में मोदी-शाह संग नजर आईं सिर्फ कनिमोझी, विपक्ष के बहिष्कार के बाद क्या है इसके सियासी मायने?
डीएमके के पास 22 सांसद है। अगर केंद्र सरकार इनके समर्थन को पाने में सफल होती है, तो सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को आसानी से पास करा सकती है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के भेंट चढ़ गई। स्पीकर ओम बिरला ने वंदे मातरम का गान कराया और सदन की कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दी गई, इसके बाद लोकसभा स्पीकर ने हमेशा की तरह अपने चैंबर में फ्लोर लीडर्स के लिए चाय पार्टी रखी, जिसमें सत्ता पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ,केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे, जबकि विपक्ष में से डीएमके सांसद एम के कनिमोझी पहुंचीं। उनके पहुंचने को सत्ता पक्ष के लिए काफी अहम माना जा रहा है। आपको बता दें मौजूदा समय में डीएमके के पास 22 लोकसभा सांसद हैं, जो केंद्र सरकार के लिए काफी अहम हैं।

कांग्रेस-सपा समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने चाय पार्टी का बहिष्कार किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव चाय पार्टी से दूर रहे। चाय पार्टी में विपक्ष की तरफ से सिर्फ डीएमके की सांसद एम के कनिमोझी पहुंचने से सियासत गरमा गई है, इसके अलग अलग तरीके से सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद डीएमके सत्ता से बाहर हो गई थी, कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके का समर्थन किया, जिसकी वजह से कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में दरार आ गई।

कनिमोझी के चाय पार्टी में पहुंचने पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु की डीएमके अब विपक्ष से अलग दूरी बनाते हुए सत्ता पक्ष के करीब दिख रही है। उनका ये भी कहना है कि यदि केंद्र की मोदी सरकार डीएमके को साधे रखती है,और अपने पाले में शामिल करने में सफल होती है तो आगामी समय में परिसीमन विधेयक को पास कराने में मदद मिलेगी। उसकी राह सरल हो सकती है, क्योंकि अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान डीएमके के विरोध के चलते बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार परिसीमन विधेयक को पास कराने में विफल रही थी। अप्रैल के विशेष सत्र में 528 सदस्यों में से 298 ने पक्ष में और 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट किए, बिल पारित नहीं हुआ। कांग्रेस - सपा और डीएमके ने बिल के विरोध में मतदान किया।

पिछले साल मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद जब विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी का बहिष्कार किया था, तब उसमें डीएमके भी शामिल थी। पिछले समय डीएमके का कोई भी नेता चाय पार्टी में शामिल नहीं हुआ था, लेकिन इस बार कनिमोझी पहुंचीं। इससे सियासत में एक नए समीकरण की संभावना देखी जा रही है।

आपको बता दें मोदी सरकार को परिसीमन विधेयक पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत है। केंद्र इसके लिए डीएमके पर निर्भर है। इसके लिए एनडीए सरकार के नेताओं ने परिसीमन को लेकर मॉनसून सत्र से पहले डीएमके से संपर्क किया था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण सरकार यह विधेयक पेश नहीं कर सकी। यदि डीएमके को साथ लाने में एनडीए सफल होती है तो आने वाले समय में परिसीमन बिल के साथ- साथ फिर से एक नई सियासी रणनीति और समीकरण सामने आएंगे।

मौजूदा लोकसभा में एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, टीएमसी के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के साथ आने से यह आंकड़ा 319 हो गया। शरद पवार की पार्टी 8 सांसदों के आने पर नंबर 327 हो गया, इसके अलावा अप्रैल में एनडीए से अतरिक्त 5 लोकसभा सांसदों ने सरकार के समर्थन में मतदान किया था, उसे जोड़ देते हैं फिर ये नंबर 332 हो जाता है। दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए। ऐसे में सरकार को 28 सांसदों की जरूरत होगी, डीएमके के पास 22 सांसद है। अगर केंद्र सरकार इनके समर्थन को पाने में सफल होती है, तो सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को बिना कठिनाई के पास करा सकती है।

Created On :   13 Aug 2026 4:06 PM IST

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