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मछली पालन: गांधी सागर के 100 हेक्टेयर में 10 हजार कैज और ईको टूरिज्म होगा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र में मछली पालन और रोजगार सृजन के लिए शुक्रवार को भोपाल में मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। सम्मेलन में 200 निवेशकों और 640 मत्स्य पालक शामिल होंगे। ज्ञात हो कि प्रदेश के 27 बड़े तालाबों व अमृत सरोवरों में केज कल्चर के साथ एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, इन्ट्रीग्रेटेड फिश, पोल्ट्री हॉरटी फार्मिंग, इको टूरिजम और ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा दिया जाना है। शासन की केज नीति के तहत अब तक केज लगाने के 4.50 लाख आवेदन शासन को मिल चुके हैं। इसमें 35 निवेशकों ने अनुबंध भी कर लिया। इन्होंने अलग-अलग जलाशयों में 25886 केज लगाने के लिए 258.86 लाख रुपए बैंक गारन्टी भी जमा भी कर दी। प्रदेश में 1 लाख केज लगाने का लक्ष्य है, जिससे 3 लाख मेट्रिक टन मत्स्योत्पादन होगा। 3.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। मत्स्य पालन को आधुनिक मत्स्य उत्पादन पद्धतियों प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, तकनीकी हस्तांतरण, निर्यात आदि के साथ जोड़कर मात्स्यिकी उद्योग का दर्जा देने का राज्य सरकार ने लक्ष्य तय किया है। जीरो वेस्ट पर होगा काम
मंदसौर-नीमच स्थित गांधी सागर जलाश्य में उद्यमी मॉडल के तहत कैज लगाई जाएगी। इसके लिए लखनऊ की एम्बीट ईको वेंचर को 10 हजार कैज लगाने के लिए अनुमति दी गई है। एम्बीट ईको वेंचर यहां एक्वापोनिक्स, हाईड्रोपोनिक्स, इंटीग्रेटेड फिश फॉर्मिंग, इको टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी संबंधी गतिविधियां 15 साल तक करेेगी। एक्वापोनिक्स-हाईड्रोपोनिक्स के तहत पर्यवारणीय संरक्षण और जीरो वेस्ट इकोनॉमी पर डेढ़ दशक तक काम होगा। लक्ष्य है कि 450 टन मछलियां निकालने का है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रेस्ट्रोरेंट, फ्लोटिंग कॉटेज-टेंट कैंपिंग और जलीय गतिविधियां भी की जाएगी।
निर्यात पर जोर
सम्मेलन के जरिए मप्र के मछली पालन में निवेश, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन और निर्यात बाजारों को प्रोत्साहित करना है। मत्स्य पालक निवेशक प्रसंस्करण सुविधाओं, कोल्ड चैन कनेक्टिविटी, गुगवता मानकों, प्रमाणीकरण और ब्रांडिंग के साथ निर्यात पर जोर रहेगा। ताकि विदेशों बाजारों तक मप्र की मछलियां जा सके और दाम अच्छे मिल सके। सम्मेलन में प्रदेश की मत्स्य निवेश एवं निर्यात गाइड-2026 और अन्य राज्यों से मछली निर्यात क्षमता से जुड़ी एसओपी भी रिलीज की जाएगी। प्रदेश के बड़े बांधों और अमृत सरोवरों में एकीकृत केज कल्चर इकाइयों काे भी ऑनलाइन शुरु किया जाएगा।
Created On :   22 Oct 2026 11:16 PM IST














