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MP News: शहडोल में 222 करोड़ की धान सड़ने और सीहोर में किसान से रिश्वत मांगने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में किसानों से जुड़े शहडोल और सीहोर के मामलों को लेकर कृषि व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि शहडोल में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करोड़ों रुपए का धान खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगकर अंकुरित हो रहा। वहीं सीहोर में वेयरहाउस की सब्सिडी जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आई। ये घटनाएं किसानों के प्रति सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को सामने लाती हैं। शहडोल में वर्ष 2025-26 में करीब 9.44 लाख क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर खरीदा गया। जिसकी कीमत 222 करोड़ रुपए से अधिक है। और अब यह लंबे समय से खुले में पड़ा हुआ है। बारिश के कारण धान के खराब और अंकुरित होने की स्थिति सामने आई है। वहीं धान का समय पर उठाव और मिलिंग नहीं होने से किसानों की मेहनत से खरीदा गया अनाज बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। धान की एक-एक बोरी में किसान की मेहनत, पसीना और उम्मीद जुड़ी होती है। सरकार अगर समय पर भंडारण, परिवहन और मिलिंग की व्यवस्था नहीं कर सकती तो किसानों से जुड़ी खरीद व्यवस्था का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी बड़ी मात्रा में धान खुले में क्यों पड़ा रहा। जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर उठाव क्यों नहीं कराया। बारिश से खराब हुए धान की जिम्मेदारी किसकी होगी। सरकारी नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
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किसानों को क्यों करनी पड़ रही शिकायत
पटवारी ने कहा सीहोर में वेयरहाउस की सब्सिडी जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत बेहद गंभीर है। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अनुसार शिकायत के बाद विपणन अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। शिकायत में भैरुंदा तहसील के शिवाय वेयरहाउस से 1 लाख रुपए और रेहटी क्षेत्र के श्रीकृष्णा वेयरहाउस से 60 हजार रुपए मांगने का आरोप था। किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसी व्यक्ति को रिश्वत मांगने की शिकायत क्यों करनी पड़ी।
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पटवारी ने सरकार से पूछे सवाल
-शहडोल में धान खुले में क्यों पड़ा रहा।
-धान के समय पर उठाव और मिलिंग की जिम्मेदारी किस विभाग और अधिकारी की थी।
-बारिश से खराब धान से होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
-समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अनाज के सुरक्षित भंडारण की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं है।
-कृषि एवं वेयरहाउस सब्सिडी की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतों को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही।
-किसानों और कृषि उद्यमियों को सब्सिडी, भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति कब समाप्त होगी।
Created On :   23 Sept 2026 11:40 PM IST











