MP News: एक साल से 523 कॉलेजों में कंप्यूटर-साइंस लैब अधर में, अब करीब 40 करोड़ अधिक होंगे खर्च

एक साल से 523 कॉलेजों में कंप्यूटर-साइंस लैब अधर में, अब करीब 40 करोड़ अधिक होंगे खर्च
125 करोड़ के टेंडर में चहेती कंपनी नहीं आई तो अफसरों ने कर दिया टेंडर निरस्त

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र के 323 सरकारी कॉलेजों में 20 सीटर कंप्यूटर लैब की आपूर्ति, इंस्टॉलेशन, कमीशनिंग-परीक्षण और 200 कॉलेजों में साइंस लैब (कुल 523 कॉलेज) में डिजीटलाइजेशन का टेंडर विवादों में है। इन कॉलेजों में आईटी सामग्री की खरीदी के लिए टेंडर की तकनीकी बीड 5 अगस्त को खोली, जिसमें एसर कंपनी की तरफ से एक्स्ट्रानेट टेक्नोलॉजीस लि व आर्मी इंफोटेक लिमिटेड और डेल की तरफ से इंटेंस टेक्नोलॉजीस क्वालिफाई हुई। लेकिन टेंडर में चहेती कंपनी पेगासस रिटेल इंडिया प्रालि सफल नहीं हुई तो विभाग ने साढ़े तीन साल पुराने (साल 2023) आईटी-वर्चुअल क्लासरुम की स्थापना संबंधी हवाला देकर टेंडर ही निरस्त कर दिया। अब इस टेंडर प्रक्रिया की त्रुटियों, शर्तें बदलने और वेंडर के अनुसार शर्तें गढ़ने की शिकायतें मुख्यमंत्री-मंत्री, प्रमुख सचिव, कमिश्नर सहित ईओडब्ल्यू-लोकायुक्त और पक्ष-विपक्ष तक पहुंची है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस पूराने काम का हवाला देकर टेंडर निरस्त किया गया है, उससे वर्तमान टेंडर का कोई संबंध नहीं है। पेगासस रिटेल इंडिया प्रालि कंपनी के प्रमुख हर्षवर्धन धाकड़ और एक सीनियर अफसर के कारण टेंडर में बार-बार मनमाफिक बदलाव किया गया। वेंडर को काम दिया जा सके, इसलिए तरीख बढ़ाई, लेकिन निर्माता कंपनियों के साथ वेंडर की शर्तें तय नहीं हो पाई। इसके चलते पेगासस रिटेल इंडिया प्रालि टेंडर में भाग नहीं ले पाया। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने टेंडर ही निरस्त कर दिया।

जबकि कंप्यूटर लैब और साइंस लैब बनाने के लिए राज्य सरकार (साधिकार समिति) ने 25 जुलाई, 2025 को ही 83.21 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। अिधकारियों और वेंडर की सांठगांठ के चक्कर में कॉलेजों में दोनों काम नहीं हो पाए। एक साल में अब आईटी सामग्री के दाम बढ़ने से यह काम 125-130 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। जबकि समय पर यह काम होता तो स्वीकृत बजट में ही काम हो सकता था। इस खरीदी प्रक्रिया, टेंडिरिंग प्रक्रिया को लेकर उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाह से बात करना चाही, लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। पेगासस रिटेल इंडिया प्रालि के प्रमुख हर्षवर्धन धाकड़ ने भी बात नहीं की।

2023 के वर्क ऑर्डर का हवाला देकर किया निरस्त

आयुक्त सिपाहा ने टेंडर निरस्त कर दिया, जबकि इसे मंजूर और निरस्त करने का अिधकार साधिकार समिति को है। आयुक्त को सिर्फ 10 करोड़ रुपए तक के अिधकार है। सिपाहा ने 2023 के एक अन्य वर्क ऑर्डर का हवाला दिया कि 400 कॉलेजों में वर्चुअल क्लासरुम बनाने का काम टेलीकम्यूनिकेशंस कंसलटेंट इंडिया लि. (टीसीआईएल) ने किया। परफॉरमेंस खराब होने के कारण काम नहीं हो पाया। जबकि मौजूदा टेंडर और 2023 के टेंडर का कोई संबंध नहीं है, लेकिन मौजूदा टेंडर निरस्त कर दिया।

इस तरह टेंडर में किया गया बदलाव

- चहेती कंपनी पेगासस रिटेल इंडिया प्रालि ने टेंडर की तारीख 27 जुलाई बढ़ाने का कहा तो, विभाग ने 4 अगस्त, 2026 तारीख बढ़ा दी।

- ओईएम अथवा वेंडर के हिसाब से तकनीकी क्वालिफिकेशन-शर्तों में बदलाव कर दिया। जबकि टेंडर में एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और टेक्निकल स्पेसिफिकेशन विभाग की ज़रूरतों के आधार पर बनाए गए थे, जिन्हें वेंडर और अफसरों ने अपने प्रभाव से वेंडर के अपुसार बदल दिया।

- पेगासस रिटेल इंडिया प्रालि ने टेंडर नंबर 49/SPD/RFB/2022-23 में ₹49 करोड़ के टर्नओवर क्राइटेरिया पर आपत्ति ली और इसे कम करने को कहा तो विभााग ने घटाकर 25 करोड़ कर दिया।

- वर्ष 2025 के टेंडर नंबर 101/SPD/RFP/2025 में विभाग ने ₹40 करोड़ टर्नओवर मांगा इसमें भी चहेते वेंडर के आग्रह पर विभाग ने इसे ₹52 करोड़ टर्नओवर कर दिया।

- प्री-बिड मीटिंग में पेगासस ने क्वेरी की कि डेस्कटॉप प्रोसेसर, प्रिंटर कार्ट्रिज और फर्नीचर सर्टिफिकेशन के लिए AIOTA/BIFMA जैसी शर्तें हटा दी जाएं, इन्हें हटा कर नेटवर्क स्विच पोर्ट सहित दूसरे टेक्निकल स्पेसिफिकेशन में बदलाव कर दिया।

Created On :   23 Sept 2026 11:30 PM IST

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