MP News: अब कोई भी कोर्ट सरकारी सेवकों के खिलाफ सीधे परिवाद पर संज्ञान नहीं ले सकेगा

अब कोई भी कोर्ट सरकारी सेवकों के खिलाफ सीधे परिवाद पर संज्ञान नहीं ले सकेगा
नोटिस देने के बाद गिरफ्तार करने के बजाये पुलिस चालान पेश करने के समय उपस्थित होने का शपथ-पत्र ले सकेगी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राज्य के पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा के स्पेशल डीजी पंकज कुमार श्रीवास्तव ने डीजीपी कैलाश मकवाणा के निर्देश पर राज्य की सभी पुलिस इकाईयों के प्रमुखों को बीएनएस के तहत दो सर्कुलर जारी किये हैं। पहले सर्कुलर में कहा गया है कि कोई भी मजिस्ट्रेट किसी सरकारी सेवक के विरुध्द परिवाद (मुकदमे) में संज्ञान लेने के पूर्व ऐसे सरकारी सेवक के वरिष्ठ अधिकारी से विस्तृत प्रतिवेदन प्राप्त करेगा तथा संबंधित सरकारी सेवक के दावों पर विचार करने के उपरान्त ही परिवाद पर संज्ञान ले सकेगा।

उल्लेखनीय है कि बीएनएस 2023 की धारा 175(4) सरकारी सेवकों के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े मामलों में जांच का आदेश देने से पहले एक विशेष प्रक्रिया और सुरक्षा कवच प्रदान करती है। यह धारा उन मामलों पर लागू होती है जहां किसी लोक सेवक पर उसके सरकारी काम के दौरान किसी अपराध को करने का आरोप लगाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सेवकों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए झूठी और बेवजह की कानूनी शिकायतों से बचाया जा सके।

दूसरे सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस यदि किसी आरोपी के खिलाफ नोटिस जारी करती है तथा उसे इस आरोपी को गिरफ्तार करने की जरुरत नहीं है तो वह आरोपी से शपथ-पत्र ले सकेगी कि प्रकरण में न्यायालय में चालान पेश करने के समय आरोपी अनिवार्य रुप से उपस्थित रहेगा। उल्लेखनीय है कि बीएनएस 2023 की धारा 35(3) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को संज्ञेय अपराध के मामले में तुरंत गिरफ्तार करना आवश्यक नहीं है, तो पुलिस अधिकारी उसे जांच में शामिल होने के लिए लिखित नोटिस जारी करेगा। यह नियम मुख्य रूप से 7 साल या उससे कम सजा वाले मामलों में लागू होता है। पुलिस हर मामले में तुरंत गिरफ्तार करने के बजाय नोटिस देकर पूछताछ को प्राथमिकता देती है।

Created On :   24 Sept 2026 12:50 AM IST

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