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MP News: फर्जी एफडीआर से शराब ठेका देने के मामले में आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा सस्पेंड

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में शराब दुकानों के ठेके से जुड़े मामले में आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। रायचूरा पर भोपाल में वर्ष 2024-25 के दौरान शराब दुकानों के ठेके और लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं करने के आरोप हैं।
यह मामला 8 अक्टूबर को ‘सबकी खबर’ यूट्यूब चैनल पर प्रसारित खबर और 9 अक्टूबर को दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार के बाद सामने आया था। आरोपों की जांच के लिए आबकारी विभाग ने दो सदस्यीय टीम बनाई थी। टीम की रिपोर्ट में रायचूरा की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई। इसके बाद विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।
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AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने फर्जी बताई एफडीआर
जांच में सबसे गंभीर मामला 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की ई-एफडीआर से जुड़ा सामने आया। रिकॉर्ड में AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर और उसके सत्यापन की रिपोर्ट दर्ज थी। विभाग ने बैंक से इसकी पुष्टि कराई तो बैंक ने 12 अक्टूबर को जारी अपने पत्र में कहा कि यह ई-एफडीआर उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि एफडीआर के सत्यापन के लिए विभाग की ओर से मई 2024 में पत्र जारी किया गया था, लेकिन संबंधित अधिकारी तक पत्र पहुंचने का रिकॉर्ड नहीं मिला। बैंक को सत्यापन के लिए पत्र भेजे जाने का प्रमाण भी फाइल में नहीं था। इसके बजाय लाइसेंसी जसवंत के ई-मेल से मिली सत्यापन रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया। जांच दल ने इसे गंभीर अनियमितता माना।
नियमों के खिलाफ बैंक की प्रतिभूति स्वीकार करने का आरोप
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शराब ठेके के लिए जमा कराई गई प्रतिभूति में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। संबंधित नियमों के तहत कुछ निर्धारित श्रेणियों के बैंकों की प्रतिभूतियां ही स्वीकार की जा सकती थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक उस समय निर्धारित तीन श्रेणियों में शामिल नहीं था। इसके बावजूद उसकी एफडीआर स्वीकार की गई।
इसके अलावा, ठेकेदार की ओर से प्रतिभूति की आधी राशि 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपये नकद जमा की गई थी। बाकी आधी राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा करनी थी, लेकिन यह राशि निर्धारित समय पर जमा नहीं हुई। जांच रिपोर्ट के अनुसार, शेष प्रतिभूति 12 मई 2024 को जमा की गई, यानी 22 दिन की देरी से। आरोप है कि इस देरी पर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय प्रतिभूति स्वीकार कर ली गई।
मां माइन्स के लाइसेंस ट्रांसफर में भी मिली गड़बड़ी
जांच में मेसर्स मां माइन्स के लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। इस फर्म के लाइसेंस ट्रांसफर के लिए 10 जुलाई 2024 को आवेदन मिला था और भोपाल कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को ट्रांसफर का आदेश जारी किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसफर से पहले फर्म की साझेदारी से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की उचित जांच नहीं की गई। एक समझौता पत्र में विजय सिंह को फर्म का साझेदार बताया गया था, जबकि आबकारी पोर्टल पर उपलब्ध पूरक साझेदारी दस्तावेज के अनुसार वह फर्म के साझेदार नहीं थे।
नियमों के मुताबिक, ट्रांसफर लेने वाली फर्म को पूरी प्रतिभूति जमा करनी थी। लेकिन जांच में पाया गया कि फर्म के बजाय विजय सिंह की ओर से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई। रिपोर्ट के अनुसार, गारंटी जमा करने के समय विजय सिंह का ट्रांसफर लेने वाली फर्म से कोई दर्ज संबंध नहीं था।
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निजी खाते के चेक भी स्वीकार किए गए
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लाइसेंस ट्रांसफर के मामले में फर्म के खाते के बजाय विजय सिंह के निजी बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, विजय सिंह फर्म के साझेदार नहीं थे। ऐसे में सरकारी राजस्व की वसूली ऐसे व्यक्ति के खाते पर निर्भर हो गई, जिसका फर्म से कानूनी संबंध दर्ज नहीं था।
इसके अलावा, विभागीय पत्राचार में भी अनियमितताएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुछ व्यक्तियों को मां माइन्स का साझेदार या लाइसेंसी बताकर पत्र भेजे गए, जबकि संबंधित दस्तावेजों में उनके साझेदार होने की पुष्टि नहीं थी। एक मामले में लाइसेंस ट्रांसफर के लिए आवेदन मिलने से पहले ही संबंधित व्यक्ति को ट्रांसफर से जुड़ा पत्र जारी किए जाने का उल्लेख भी जांच में किया गया है।
विभाग ने माना- सरकारी राजस्व को जोखिम में डाला
आबकारी आयुक्त के आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आई अनियमितताएं मध्यप्रदेश राजपत्र में निर्धारित नियमों और आबकारी आयुक्त के निर्देशों के उल्लंघन से जुड़ी हैं। आदेश के मुताबिक, फर्जी ई-एफडीआर, निर्धारित श्रेणी में नहीं आने वाले बैंक की प्रतिभूति, देरी से जमा की गई प्रतिभूति और गैर-भागीदार व्यक्ति की बैंक गारंटी व चेक स्वीकार करने से सरकारी राजस्व की सुरक्षा को जोखिम में डाला गया।
विभाग ने इन मामलों को गंभीर लापरवाही और पद से जुड़े दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं करने का मामला माना है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत दीपम रायचूरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। आदेश में नियमों के अनुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी उल्लेख है।
Created On :   12 Oct 2026 10:34 PM IST













