MP News: MP में खौफ में खाकी! बेखौफ रेत और शराब माफिया, कार्रवाई करने वाले अफसरों की जा रही जान

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों रेत और शराब माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून के रखवालों पर हमला करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। जिस खाकी पर जनता की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है, जब उसी खाकी को माफिया अपने निशाने पर लेने लगें, तो प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ताजा मामला देवास का है, जहां वाहन चेकिंग के दौरान अवैध शराब से भरे एक ट्रक को टीआई दिलीप पुरी ने रोकने की कोशिश की। लेकिन ट्रक चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी और टीआई उसकी चपेट में आ गए। ट्रक का एक पहिया उनके ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल टीआई दिलीप पुरी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
यह पहला मामला नहीं है, जब अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचे पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी हो। मध्य प्रदेश में लंबे समय से रेत और शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई के दौरान इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं ने अवैध कारोबार के खिलाफ मैदान में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुरैना में वनरक्षक की हत्या
8 अप्रैल 2026 को मुरैना जिले में अवैध रेत परिवहन रोकने की कार्रवाई के दौरान वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत हो गई थी। वन विभाग की टीम चंबल नदी से रेत लेकर जा रहे वाहन को रोकने पहुंची थी। इस मामले का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में अवैध खनन से जुड़े प्रकरण की सुनवाई के दौरान भी हुआ था।
2012 में IPS नरेंद्र कुमार की मौत
मुरैना जिले के बानमोर में मार्च 2012 में आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत हो गई थी। वह अवैध पत्थर परिवहन रोकने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान मध्य प्रदेश में अवैध खनन के कारोबार की ओर खींचा था। इसी दौरान भिंड में अवैध शराब की बिक्री रोकने पहुंचे आईपीएस अधिकारी जयदेवन पर भी शराब माफिया से जुड़े लोगों ने हमला किया था।
शहडोल में ASI और पटवारी की गई जान
शहडोल जिले में भी अवैध रेत परिवहन रोकने के दौरान दो सरकारी कर्मचारियों की जान जा चुकी है। नवंबर 2023 में सोन नदी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने पहुंचे पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया था। इसके बाद मई 2024 में ब्यौहारी क्षेत्र में सहायक उप निरीक्षक महेंद्र बागड़ी की भी रेत से लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
शहडोल में तहसीलदार पर भी हमला
जनवरी 2026 में शहडोल के ब्यौहारी क्षेत्र में नायब तहसीलदार शनि द्विवेदी ने अवैध खनन की गतिविधियों को रोकने के दौरान अपनी सरकारी गाड़ी को टक्कर मारने और खुद पर हमला किए जाने की शिकायत की थी। बाद में उन्होंने अपनी निगरानी किए जाने की आशंका भी जताई थी।
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टीआई की मौत पर सियासत भी शुरू
प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों पर हो रहे हमलों को लेकर अब सियासत भी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने टीआई की मौत को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा के शासन में अब पुलिसकर्मी भी शराब माफियाओं के ट्रक से कुचले जा रहे हैं। प्रदेश की जनता जहरीली शराब पीकर जान गंवा रही है और पुलिसकर्मी शराब माफियाओं के ट्रक का शिकार हो रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौन साधे बैठे हैं।
सिंघार ने मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि आप प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ गृहमंत्री भी हैं। आखिर शराब माफियाओं पर लगाम कसने में आपकी सरकार क्यों नाकाम है? हर बार छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर बड़े जिम्मेदारों को क्यों बचाया जाता है? शराब माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है?
मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
वहीं, प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने देवास की घटना को बेहद दुखद बताया। हालांकि, उन्होंने इस मामले के तार कांग्रेस से जुड़े होने का आरोप लगाया है।
मंत्री सारंग के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल जायसवाल इस पूरे मामले में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कि टिमरनी की दुकान से इस पूरे मामले की शुरुआत हुई है। यह दुकान कांग्रेस नेता राहुल जायसवाल और उनके भाई मनीष जायसवाल की है। मामले की जांच एडीजी उपेंद्र जैन कर रहे हैं और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आखिर कब लगेगी माफिया पर लगाम?
लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या मध्य प्रदेश में रेत और शराब माफिया के सामने खाकी बेबस नजर आ रही है? देवास में टीआई की मौत ने एक बार फिर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर कब तक अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान गंवाते रहेंगे? क्या सरकार इन माफियाओं पर प्रभावी लगाम लगा पाएगी या फिर इसी तरह बेखौफ माफिया कानून के रखवालों को निशाना बनाते रहेंगे? अब निगाहें सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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