मनोरंजन: एमी अवार्ड्स के लिए नामांकित हुई वेब सीरीज ‘रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब’

डिजिटल डेस्क, भोपाल। इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित हुई सोनी लिव की सीरीज ‘रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब’ में अभिनेता मानव कौल ने अहम भूमिका निभाई है। बारामूला से आने वाले मानव के लिए यह कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें उन्होंने उस कश्मीर को देखा, जहां वे पले-बढ़े। सीरीज में कश्मीरी मुस्लिम और कश्मीरी पंडित मिलकर फुटबॉल टीम बनाने की कोशिश करते हैं। मानव कौल अभिनय के साथ थिएटर, लेखन और निर्देशन के लिए भी जाने जाते हैं। एमी नामांकन से लेकर कश्मीर, जीशान अय्यूब के साथ काम, अवॉर्ड्स, लेखन और अपने अगले निर्देशन तक उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ से खास बातचीत में कई बातें साझा कीं।
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सवाल - एमी नामांकन की खबर पर सबसे पहले क्या महसूस हुआ ?
मानव - सच कहूं तो पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। हमें लगा कि शायद कोई प्रैंक कर रहा है या मजाक हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई चीजों पर भरोसा करना मुश्किल होता है। हम लोग एक-दूसरे को बार-बार फोन करके पूछ रहे थे कि क्या यह सच है? जब पूरी तरह कन्फर्म हुआ, तब बहुत आश्चर्य हुआ। मैं छोटे शहर से आता हूं। वहां से आने पर कई बार आपके अंदर यह भावना रहती है कि शायद आप बहुत बुनियादी चीजों के भी लायक नहीं हैं। इसलिए यह मेरे लिए खास था, खासकर इसलिए भी क्योंकि यह सीरीज मेरे दिल के बहुत करीब है। मैं अक्सर अपने फैसलों को लेकर सोचता हूं। कई बार बिना ज्यादा सोचे इंस्टिंक्ट से किसी काम के लिए हां कह देता हूं और बाद में सोचता हूं कि पता नहीं मेरा फैसला सही था या नहीं। इस नामांकन के बाद लगा कि नहीं, मेरी इंस्टिंक्ट सही थी।
सवाल - ‘वेब सीरीज से जुड़ने की सबसे बड़ी वजह क्या रही ?
मानव - सबसे बड़ी वजह यही थी कि पहली बार मुझे उस कश्मीर के बारे में बताने का मौका मिल रहा था, जिसमें मैं बड़ा हुआ हूं। इसमें एक कश्मीरी मुस्लिम और एक कश्मीरी पंडित मिलकर फुटबॉल टीम बनाते हैं। मैंने बचपन में ऐसी दोस्तियां और रिश्ते देखे हैं। कश्मीर की कहानी का यह हिस्सा कहीं पीछे छूट गया है। लोग साथ रहते थे, एक-दूसरे के त्योहार मनाते थे। उस दौर की यह खूबसूरत तस्वीर तथाकथित राजनीति के बीच कहीं दब गई। मुझे लगा कि यह भी कश्मीर की कहानी है, जिसे बताया जाना चाहिए। सेट पर भी हम लोग सीन को लेकर काफी चर्चा करते थे। कई बार ऐसा हुआ कि शूटिंग एक घंटे तक रोककर इस बात पर चर्चा हुई कि सीन को किस तरह पेश किया जाए। आमतौर पर सेट पर सब लोग जल्दी में होते हैं कि किसी तरह शूटिंग पूरी हो और अगला काम शुरू हो। लेकिन यहां ऐसा नहीं था। हम पहले बात करते थे, सबकी सहमति बनती थी और फिर आराम से सीन शूट करते थे।
सवाल - भारतीय कहानियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है ?
मानव-इस तरह की अंतरराष्ट्रीय पहचान से मेकर्स को अलग तरह की चीजें बनाने का भरोसा मिलता है। जब हमारी कहानियों को बाहर भी पसंद किया जाता है तो आपको लगता है कि भारतीय कहानियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत अच्छे तरीके से कही जा सकती हैं। इससे उन लोगों को भी उत्साह मिलता है, जो कुछ अलग करना चाहते हैं। कई बार लोग यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि यही बिकता है, यही चलता है। लेकिन जब आपकी अलग कहानी को कहीं और से भी पहचान मिलती है तो आपको थोड़ा सहारा और हिम्मत मिलती है। यह बहुत जरूरी है, क्योंकि तभी कोई यह सोचकर जोखिम लेता है कि मैं कुछ अलग बनाना चाहता हूं।एक कलाकार के तौर पर अवॉर्ड आपके लिए कितना मायने रखता है?
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सवाल- आप ज्यादा किताबी दुनिया में खोते रहते हैं, लॉस्ट होने का रिस्क नहीं लगता ?
मानव- इंडस्ट्री में रहते हुए भी मैं अपने काम में ही व्यस्त रहता हूं। किसी प्रोजेक्ट के लिए हां कहता हूं और फिर जाकर शूटिंग करता हूं। मुझे यह भी नहीं पता कि मैं किस ग्लैमर इंडस्ट्री का हिस्सा हूं। अपने कमरे में बैठा होता हूं तो मुझे कोई ग्लैमर महसूस नहीं होता। मुझे लगता है कि ग्लैमर दिमाग का खेल है। दुनिया में इतने खूबसूरत किस्से और इतने शानदार लोग हैं। मुझे लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता है। अभी भी मैं एक नए नाटक की रिहर्सल करके आया हूं। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी किताबें लिखने, रिहर्सल करने, नया नाटक बनाने, वेब सीरीज या फिल्म में काम करने, यात्रा करने और कुछ नया देखने में है। रिस्क से ज्यादा खुशी मायने रखती है।
सवाल - आज भी दुनिया में लोग हिंदी किताबें पढ़ते हैं ?
मानव - अरे बहुत हैं। मैं हाल ही में एम्स्टर्डम गया था। वहां मैंने इतनी हिंदी किताबों पर साइन किए कि एक समय लगा जैसे दिल्ली में हूं। मुझे देखकर हैरानी हुई कि एम्स्टर्डम में लोगों के पास इतनी हिंदी किताबें हैं। मैं खुद भी अलग-अलग लेखकों को खोजता हूं और उन्हें पढ़ता हूं। लोग भी अच्छी चीजें खोजते हैं और पढ़ते हैं। मुझे युवाओं पर बहुत भरोसा है। आज के युवा बहुत शानदार हैं और बहुत अच्छा पढ़ते हैं। आप भले कितना भी डिजिटल हो जाइए किताबें पढ़ने का मजा अलग होता है। वह कभी खत्म नहीं होगा। यकीन मानिए।
सवाल - निर्देशक भी बन चुके हैं, उसका अनुभव कैसा रहा ?
मानव - मैंने अपनी फिल्म डायरेक्ट की है और अभी उसे पूरा किया है। यह मेरे ही उपन्यास ‘साक्षात्कार’ पर आधारित है। उम्मीद है कि फिल्म जल्द आएगी। निर्देशन का अनुभव बहुत अच्छा रहा। मुझे अपने अच्छे लोगों के साथ काम करना बहुत पसंद है और यह मेरे सबसे अच्छे अनुभवों में से एक रहा। मैं आगे भी और निर्देशन करना चाहता हूं। अभी तो लिखना, अभिनय करना और डायरेक्ट करना ही बहुत अच्छा लग रहा है। आगे देखते हैं, जिंदगी में क्या नया सामने आता है।
Created On :   3 Oct 2026 12:36 AM IST













