दिल्ली: मेवात के सद्दाम हुसैन गैंग के 2 बदमाश गिरफ्तार

July 24th, 2022

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल) ने मेवात के जबरन वसूली करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े दो फरार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

आरोपी की पहचान 30 वर्षीय अरशद खान और 39 वर्षीय मुश्ताक खान के रूप में हुई है, जो दिल्ली में जबरन वसूली के एक मामले में पिछले नौ महीने से फरार थे और उनकी गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम भी था।

पुलिस उपायुक्त (विशेष प्रकोष्ठ), जसमीत सिंह ने कहा कि दक्षिण दिल्ली में इस मेवात स्थित गिरोह के सदस्यों द्वारा अवैध गतिविधियों के बारे में विश्वसनीय जानकारी थी, जिसके बाद उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए एक टीम को तैनात किया गया था।

डीसीपी सिंह ने कहा, हमें 21 जुलाई को सिंडिकेट के सदस्यों में से एक अरशद खान के आने के बारे में विशेष सूचना मिली थी, जो फ्लावर मार्केट छतरपुर में शाम 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच अपने एक पहचान वाले से मिलने के लिए आया था। इसके बाद जाल बिछाया गया और आरोपी अरशद खान को उसी दिन पकड़ लिया गया।

पूछताछ के दौरान अरशद खान ने खुलासा किया कि उसका सहयोगी मुश्ताक खान उनके गांव में एक सुनसान घर में छिपा हुआ था। डीसीपी ने कहा, फिर एक टीम को तुरंत दौसा जिले (राजस्थान) में उनके गांव भेजा गया और मुश्ताक खान को 22-23 जुलाई की दरम्यानी रात एक घर से गिरफ्तार किया गया।

दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि वे मेवात स्थित सहयोगियों से जुड़े एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट के सदस्य हैं, जिसका नेतृत्व सद्दाम हुसैन कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, उन्होंने आगे खुलासा किया कि उन्होंने उनके 4-5 अन्य सहयोगियों के साथ दिल्ली में एक वकील से जबरन वसूली की मांग की थी और बाद में उसे ब्लैकमेल करने और धमकी देने के लिए उसका अश्लील ऑनलाइन वीडियो बनाकर उसे अपने जाल में फंसा लिया था।

गिरोह के सदस्यों का काम दिल्ली एनसीआर में भोले-भाले लोगों को फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर उन्हें लुभाना था और महिला के रूप में उनके साथ चैट करना शुरू करना था। इसके बाद गिरोह के सदस्य इन भोले-भाले लोगों को उकसाकर ऑनलाइन अश्लील हरकतें करने का लालच देकर उनका अश्लील वीडियो बनाते थे।

उन्होंने कहा, वे इन वीडियो को वायरल करने या उनके परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजने की धमकी देकर पीड़ितों से रंगदारी की मांग करते थे। अगर वे जबरन वसूली की राशि का भुगतान करने में विफल रहते तो वे उन्हें ब्लैकमेल करते थे।

(आईएएनएस)

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