‘टीवी पर खबरे देख कर टेंशन में आ जाते थे गुवाहाटी में बैठे विधायक’ : मुख्यमंत्री ने सुनाई ‘मुंबई टू गुवाहाटी वाया सूरत’ यात्रा की कहानी 

July 16th, 2022

डिजिटल डेस्क,मुंबई। शिवसेना के बागी विधायकों के सूरत होते हुए गुवाहाटी जाने के बाद मुंबई में कहा जा रहा था कि उनको जबरन वहां रोका गया है। पर विधायक गुवाहाटी में मौज कर रहे थे। शुरुआत में बागी विधायक टीवी पर न्यूज देख कर टेंशन में आ जाते थे पर बाद में सभी रिलैक्स हो गए। वह समय कैसे बीता पता ही नहीं चला। यह बात मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कही। वे शनिवार को शिवसेना के बागी विधायक मंगेश कुडालकर द्वारा उनके विधानसभा क्षेत्र चूना भट्टी में आयोजित सम्मान समारोह में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं कभी वादाखिलाफी नहीं करता। एक बार वचन दे दिया तो फिर सिर कट जाए पर पीछे नहीं हट सकता।  

मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि मैंने जो भूमिका अपनाई उसके पीछे क्या कारण था, आप लोगों ने देखा है। बाला साहेब के विचार, उनके हिंदुत्व के विचार, व महाराष्ट्र के विकास के लिए हम आगे बढ़े हैं। मैंने सत्ता के लिए यह सब नहीं किया। शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोवा में विधायकों के नाचने को लेकर शिंदे ने कहा कि इस पर खूब टीका-टिप्पणी की गई। आनंद के क्षण में नाचना स्वभाविक है। आनंद की कोई परिभाषा हो तो मुझे नहीं पता। हमारी हर बात पर टीका-टिप्पणी की गई। गुवाहाटी में हमने अपना संयम कायम रखा। हम कट्टर शिवसैनिक हैं इस लिए अन्याय बर्दास्त नहीं होता। इस लिए हमनें मीडिया को जवाब देने के लिए शांत स्वभाव वाले दिपक केसरकर को जिम्मेदारी दी। मुंबई से शुरु हमारी यात्रा के दौरान हम गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर पहुंचे तो कहा गया कि वहां बली दिया जाता है। 40 लोगों की बली होगी पर देवी ने हमें आशीर्वाद दिया और बोलने वाले का क्या हुआॽ

रोज होती थी बैठक 
गुवाहाटी प्रवास की चर्चा करते हुए शिंदे ने कहा कि वहां हमारी रोज बैठक होती थी। शुरुआत में टीवी पर न्यूज देख कर सब थोड़े टेंशन में थे। पर जल्द ही एक-एक विधायक बढ़ने लगे। हमारी संख्या 50 तक पहुंच गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी कभी भी मुझ से मिल सकता है। मैं जहां जाता हूं वहीं मंत्रालय शुरु हो जाता है। मैंने मुख्यमंत्री बनने के लिए यह सब नहीं किया। शाखा प्रमुख से राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा पर इसके लिए अपार मेहनत की। कभी विदेश घूमने नहीं जा सका। शिंदे ने कहा कि मुझ से शिवसेना के विधायक कहते थे कि इस स्थिति में चुनाव लड़ना जीतना मुश्किल होगा। जिनके विचार बाला साहेब को कभी स्वीकार नहीं थे उनके साथ जाकर सरकार बनाना शिवसैनिकों को पसंद नहीं था। 

मांगा था गडचिरोली का पालकमंत्री पद  
शिंदे ने कहा कि मैं नगरविकास विभाग का मंत्री था। गडचिरोली से नक्सलवाद खत्म करने के लिए मैंने खुद वहां का पालकमंत्री बनने की इच्छा जताई थी। गडचिरोली का विकास कर मैंने वहां की तस्वीर बदलने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि हम तो सत्ता में थे उसके बावजूद बगावत बाला साहेब के विचार के साथ चलने के लिए किया।         


 

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