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कचरा बीनने वाले शख्स का बेटा बनेगा डॉक्टर, जोधपुर एम्स में हुआ एडमिशन

July 20th, 2018 13:44 IST
कचरा बीनने वाले शख्स का बेटा बनेगा डॉक्टर, जोधपुर एम्स में हुआ एडमिशन

डिजिटल डेस्क, देवास। मध्य प्रदेश  के देवास से एक कचरा बीनने वाले शख्स के बेटे, आशाराम चौधरी का सिलेक्शन एमबीबीएस के लिए हुआ है। आशाराम चौधरी की सफलता से उनके घर में खुशी का माहौल है। आशाराम ने डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने के लिए जोधपुर के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन ले लिया है। 23 जुलाई से उनकी एमबीबीएस की क्लासेस शरू हो जाएगी। इसके अलावा आशाराम किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना में रिसर्च साइंटिस्ट भी चुने जा चुके हैं। जर्मनी के सिल्वर जोन फाउंडेशन संस्थान में भी उनका चयन हो चुका है, यहां उन्होंने 332वीं इंटरनेशनल रैंक हासिल की।

आशाराम का खुशी जाहिर करते हुए कहा, एम्स से एमबीबीएस करने का मेरा सपना पूरा होने जा रहा है। मेरे माता-पिता मजदूरों के रूप में काम करते थे और उन्होंने मेरे पढ़ाई के लिए  बहुत संघर्ष किया। 'मैं अपने माता-पिता और नवोदय विद्यालय जहां से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। दक्षिणी नींव का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। मेरे गांव में एक डॉक्टर ने मुझे इस पेशे को चुनने के लिए प्रेरित किया। अब जब मुझे एमबीबीएस मिल गया है, तो मैं डॉक्टक बनकर लोगों की मदद करना चाहता हूं क्योंकि यहां डिग्री के साथ कोई डॉक्टर नहीं है। "

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आशाराम चौधरी के पिता रणजीत चौधरी यह बताकर दुखी हैं कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उन्होंने कहा, "उन्हें एम्स में प्रवेश मिला है, लेकिन हमारे पास उनके समर्थन के लिए पैसा नहीं है। चलो देखते हैं कि हम क्या कर सकते हैं। अब तक एक डॉक्टर और कलेक्टर ने हमारी मदद की"।

इन्हें दिया सफलता का श्रेय 

माता-पिता के अलावाआशाराम ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों और देवास के तत्कालीन एडीएम डॉ. कैलाश बुंदेला को दिया हैं। डॉ. बुंदेला ने उनकी मदद की है। जब एम्स में एडमिशन हुआ तो एडीएम सर ने भी शुभकामनाएं दी।

आशाराम की स्कूल लाइफ 

आशाराम की प्रारंभिक पढ़ाई गांव के पास ही सरकारी स्कूल में हुई। चौथी कक्षा में दत्तोतर के मॉडल स्कूल में प्रवेश लिया। जिसके बाद आशाराम ने कड़ी मेहनत की और छठी में जवाहर नवोदय विद्यालय चंद्रकेशर में पहुंच गए। यहां दसवीं तक पढ़ाई की। जिसके बाद उन्होंने दक्षिणा फाउंडेशन पुणे में अच्छे अंकों के साथ पास 11वीं-12वीं की परीक्षा पास की। इसके साथ में लगातार उन्होंने मेडिकल प्रवेश की तैयारी भी करते रहे और इसी साल मई में एम्स में प्रवेश के लिए आशाराम ने परीक्षा दी।  जिसमें उनकी मेहनत रंग लाई। 

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पारिवारिक परिचय 

मध्य प्रदेश  के देवास से लगभग 40 किमी दूर विजयागंज मंडी में आशाराम चौधरी का परिवार रहता है। आशाराम चौधरी के पिता रणजीत चौधरी पन्नियां बीनकर और खाली बोतलें जमाकर घर का खर्च चलाते हैं, तो कभी खेतों में काम करते हैं। आशाराम की मां ममता बाई एक गृहिणी है। एक छोटी बहन है जो नवोदय विद्यालय में 12 की पढ़ाई कर रही है।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।