अजब गजब: 3 साल तक पेट में छिपा रहा 'पत्थर का बच्चा', जब डॉक्टरों ने खोला राज तो रह गए हैरान

3 साल तक पेट में छिपा रहा पत्थर का बच्चा, जब डॉक्टरों ने खोला राज तो रह गए हैरान
मेडिकल साइंस में कई बार ऐसे दुर्लभ मामले सामने आते हैं, जिनके बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सोमालीलैंड में सामने आया है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मेडिकल साइंस में कई बार ऐसे दुर्लभ मामले सामने आते हैं, जिनके बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सोमालीलैंड में सामने आया है। यहां 42 साल की एक महिला के पेट से करीब 3 साल बाद मृत भ्रूण निकाला गया। हैरानी की बात यह थी कि इतने समय तक पेट में रहने के कारण भ्रूण के चारों ओर कैल्शियम की परत जम गई थी और वह पत्थर की तरह सख्त हो चुका था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए इसे बाहर निकाला। इसके बाद महिला की सेहत में भी सुधार हुआ।

महिला पिछले करीब तीन साल से पेट के निचले हिस्से में दर्द और भारीपन की समस्या से परेशान थी। शुरुआत में उसने इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन समय के साथ तकलीफ बढ़ती गई। जब दर्द असहनीय हो गया तो उसने डॉक्टरों से संपर्क किया। जांच के लिए अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन कराया गया। रिपोर्ट सामने आने पर डॉक्टर भी चौंक गए। महिला के पेट में एक मृत भ्रूण मौजूद था, जिसके आसपास कैल्शियम की मोटी परत जम चुकी थी। यह मामला 'लाइव साइंस' की रिपोर्ट में इंटरनेशनल मेडिकल केस रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के हवाले से बताया गया है।

क्या होता है लिथोपेडियन या 'स्टोन बेबी'?

मेडिकल भाषा में इस दुर्लभ स्थिति को 'लिथोपेडियन' (Lithopedion) कहा जाता है। आम भाषा में इसे 'स्टोन बेबी' यानी पत्थर का बच्चा भी कहते हैं। यह स्थिति तब बनती है, जब गर्भाशय के बाहर पेट में भ्रूण का विकास होने लगता है। इसे एब्डॉमिनल प्रेग्नेंसी कहा जाता है। ऐसी गर्भावस्था में भ्रूण की मृत्यु होने के बाद कभी-कभी वह शरीर के अंदर ही रह जाता है।

दरअसल, जब भ्रूण का आकार बड़ा हो जाता है, तो शरीर उसे पूरी तरह अवशोषित नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में शरीर संक्रमण और दूसरी जटिलताओं से बचाव के लिए मृत भ्रूण के आसपास कैल्शियम जमा करने लगता है। धीरे-धीरे कैल्शियम की यह परत इतनी सख्त हो जाती है कि भ्रूण पत्थर जैसा दिखाई देने लगता है।

यह बेहद दुर्लभ मेडिकल स्थिति है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 400 वर्षों में दुनियाभर में इसके लगभग 330 से 340 मामले दर्ज किए गए हैं।

मुश्किल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने निकाला भ्रूण

जांच में स्थिति का पता चलने के बाद डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन करने का फैसला लिया। सर्जरी के दौरान उसके पेट से कैल्शियम की परतों में लिपटे मृत भ्रूण को बाहर निकाला गया। यह ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इतने लंबे समय तक पेट में रहने के कारण भ्रूण के आसपास सख्त कैल्शियम जमा हो चुका था।

सर्जरी के बाद महिला की हालत में तेजी से सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। करीब छह महीने बाद हुई जांच में भी उसकी सेहत सामान्य पाई गई। लंबे समय से परेशान कर रहा पेट का दर्द भी खत्म हो गया।

समय पर जांच नहीं होने से बढ़ सकता है खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की दुर्लभ स्थिति का समय पर पता लगाना बेहद जरूरी है। खासकर ग्रामीण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले इलाकों में गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और सोनोग्राफी नहीं होने से ऐसी समस्याएं लंबे समय तक छिपी रह सकती हैं। इस मामले ने एक बार फिर गर्भावस्था के दौरान नियमित मेडिकल जांच और समय पर इलाज के महत्व को सामने ला दिया है।

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