फोर्टिस अस्पताल मामले में बड़ा खुलासा, केस दबाने के लिए 25 लाख रिश्वत की पेशकश

फोर्टिस अस्पताल मामले में बड़ा खुलासा, केस दबाने के लिए 25 लाख रिश्वत की पेशकश

Bhaskar Hindi
Update: 2017-12-07 04:23 GMT
फोर्टिस अस्पताल मामले में बड़ा खुलासा, केस दबाने के लिए 25 लाख रिश्वत की पेशकश

डिजिटल डेस्क, गुरुग्राम। गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में हुई सात साल की बच्ची के मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि अस्पताल ने मामले को दबाने के लिए बच्ची के परिवार को 25 लाख रुपए की रिश्वत का लालच दिया था। इतना नहीं नहीं दवाओं के नाम पर अस्पताल ने 1737 फीसदी तक का मुनाफा कमाया।

डेंगू से पीड़ित थी बच्ची

सात साल की आद्या डेंगू से पीड़ित थी। परिजनों ने बच्ची को इलाज के लिए फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान आद्या की मौत हो गई।  बच्ची के परिजनों को  अस्पताल ने  इलाज के नाम पर 16 लाख रुपए का बिल थमा दिया। बच्ची के पिता जयंत सिंह ने जब इस मामले को लेकर अस्पताल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया तो उन्हें मुंह बंद रखने के लिए 25 लाख रुपए की रिश्वत की पेशकश की गई।

जांच रिपोर्ट में खुलासा

हरियाणा सरकार की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि फोर्टिस अस्पताल में जेनेरिक दवांए मौजूद थी, बावजूद इसके ब्रांडेड दवाओं का इस्तेमाल अस्पताल ने किया। इन दवाओं पर अस्पताल ने 108 से 1737 फीसदी तक का मोटा मुनाफा कमाया।

लापरवाही नहीं ये है मर्डर

हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बुधवार को कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार एफआईआर दर्ज कराने की योजना बना रही है.
साधारण शब्दों में कहा जाए तो, यह मौत नहीं बल्कि हत्या थी.  विज ने ये भी कहा कि इलाज के दौरान कई तरह की अनियमितताएं हुईं, कई तरह की अनैतिक चीजें हुईं और प्रोटोकॉल और चिकित्सीय कर्तव्यों का पालन नहीं किया गया.

जेल और जुर्माने का प्रावधान

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के मुताबिक डेंगू ऐसी बीमारी है जिसकी जानकारी अधिकारियों को दी जाती है लेकिन इस बारे में एफएमआरआई द्वारा कोई जानकारी स्थानीय अधिकारियों को नहीं दी गई. सीएमओ ने उन्हें इस संबंध में नोटिस जारी किया है. इस तथ्य को छिपाने की वजह से एक महीने से छह महीने तक की जेल और 200 से 1,000 रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है.

पिता की शिकायत पर सुर्खियों में आया था मामला

यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब पीड़ित पिता ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को ट्वीट कर यह जानकारी दी कि अस्पताल ने उनकी बेटी की मौत के बाद इलाज के नाम पर 16 लाख रुपए से अधिक का बिल भरने को कह दिया। यह बिल 15 पेज का था और इसमें 14-15 दिन के इलाज के दौरान 660 सीरिंज और 2700 ग्लब्स इस्तेमाल का उल्लेख किया गया। इसके अलावा दवाइयों को ही लाखों रुपए का बिल बना दिया गया। यह ट्वीट सोशल मीडिया में सुर्खियों में आया तो नड्डा ने जांच के आदेश दिए। दूसरी ओर हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी मामले का नोटिस लेते हुए जांच कमेटी गठित कर दी। कमेटी ने जांच पूरी की और बुधवार को सरकार को सौंप दी। 

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