जलियां वाला बाग नरसंहार : 100 साल पहले अंग्रेजों ने जहां भून दिया था सैकड़ों भारतीयों को

जलियां वाला बाग नरसंहार : 100 साल पहले अंग्रेजों ने जहां भून दिया था सैकड़ों भारतीयों को

Bhaskar Hindi
Update: 2019-04-12 18:24 GMT
जलियां वाला बाग नरसंहार : 100 साल पहले अंग्रेजों ने जहां भून दिया था सैकड़ों भारतीयों को
हाईलाइट
  • जनरल डायर ने कर दी थी हजारों भारतीयों की हत्या।
  • जलियांवाला बाग कांड के 100 साल पूरे।
  • ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने जलियांवाला बाग कांड को इतिहास की दुखद घटना बताते हुए खेद जताया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज भारत जलियांवाला बाग कांड की शताब्दी मना रहा है। सौ साल पहले हुई इस घटना ने समूचे राष्ट्र को हिलाकर रख दिया था। वह घटना जो ब्रिटिश राज की कायरता का बयान है, वह घटना जो ब्रिटिश राज की धोखेबाज फितरत का ऐतिहासिक सबूत है। जानते तो सभी हैं कि आखिर उस दिन क्या हुआ जो 19 अप्रैल 1919 की यह तारीख भारतीय इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज हो गई, लेकिन तब के ये जख्म आज भी हर देशवासियों के जेहन में हरे हैं।

एक शायर ने कहा कि"ज़ख़्म अभी तक ताज़ा हैं हर दाग़ सुलगता रहता है सीने में इक जलियाँ-वाला-बाग़ सुलगता रहता है ।" नफ़स अम्बालवी की यह दो पंक्तियां काफी होंगी 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग कांड में भारतीयों के साथ हुई क्रूरता को मापने के लिए। 13 अप्रैल को बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। साल 1919 में उस दिन भी लोग परिवार सहित बैसाखी का मेला देखने गए थे। वहीं कुछ लोग अमृतसर के जलियांवाला बाग में सरकार का शांतीपूर्ण तरीके से विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे। इस दौरान इलाके में कर्फ्यू लगा हुआ था। बाग में नेता भाषण दे रहे थे और लोग ध्यान से सुन रहे थे कि इतने में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर 90 ब्रिटिश सैनिकों के साथ वहां पहुंच गया। जनरल डायर ने मैदान में रॉलेट एक्ट का विरोध कर रहे लोगों पर नजरें जमा ली।

अंग्रेज अधिकारी और सैनिकों ने बाग को चारों ओर से घेरकर बाग में मौजूद लोगों को खुले आसमान के नीचे कैद कर दिया। इसके तुरंत बाद ही अपने सैनिकों को निहत्थे भारतीयों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। अपने जनरल के हुक्म की तामील करते हुए सैनिकों ने सैकड़ों मासूमों के बदन को पीतल से छलनी कर दिया। बर्बरता का आलम यह था कि जालिम अंग्रेजों ने महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा। बताया जाता है कि सैनिकों ने मात्र 10 मिनट के भीतर ही करीब 1650 राउंड गोलियां मासूमों पर दाग दीं। कहा जाता है कि अपनी जान बचाने के लिए महिलाएं कुंए में कूद गई थी। इतिहास के पन्नों में आज भी हजारों मौतों का जिक्र मिलता है। जबकि सरकारी दस्तावेजों में 484 मौतें ही दर्ज हैं।

484 भारतीयों का हत्यारा कौन था जनरल डायर
हजारों मासूम भारतीयों की मौत का जिम्मेदार डायर ब्रिटिश राज में एक सेनाधिकारी था। ब्रिगेडियर डायर इस हत्याकांड के द्वारा पूरे पंजाब में आतंक फैलाना चाहता था। वह बात जिसने सभी को अचंभे में डाला वह थी डायर का हमले को लेकर जवाब। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हमले को लेकर सवाल किए जाने के बाद डायर ने कहा कि कुछ भारतीयों ने हमारे ऊपर हमला किया था, जिसके जवाब में हमने उनपर हमला किया। बताया जाता है कि इतने बेरहम हत्याकांड को अंजाम देने के बाद जनरल डायर कभी भी चैन से नहीं रह पाया। उसे रात दिन हत्याकांड की बातें ही याद आती रहती थी। डायर की मौत को लेकर भी दो बाते कही जाती हैं। पहली कि डायर की हत्या ऊधम सिंह ने लंदन के कैक्सटन हॉल में गोली मारकर हत्या कर दी थी। दूसरी कि जनरल की मौत हैमोरेजिक स्ट्रोक के कारण हुई यहीं कारण डायर की मौत का भी बना और उसने  23 जुलाई, 1927 को ब्रिस्टल में आखिरी सांस ली।

थेरेसा मे की सहानुभूति 
ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने बुधवार को भारत में 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए खेद व्यक्त किया और इसे ब्रिटिश भारतीय इतिहास के लिए शर्मनाक धब्बा बताया। हालांकि उन्होंने पूर्ण माफी नहीं मांगी। इस पर मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने संसद में पीएम से इस घटना पर पूर्ण स्पष्ट और विस्तृत माफी की मांग की। थेरेसा मे ने संसद में कहा, "जलियावाला बाग में जो हुआ और इससे जो कष्ट पैदा हुआ उसके लिए हमें गहरा अफसोस है।"उन्होंने कहा, "1919 की जालियांवाला बाग त्रासदी ब्रिटिश-भारतीय इतिहास के लिए शर्मनाक धब्बा है।

जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जालियांवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे बीते हुए इतिहास का दुखद उदाहरण है।" थेरेसा ने कहा, "मुझे खुशी है कि आज ब्रिटेन-भारत के संबंध काफी अच्छे हैं। भारतीय प्रवासियों का ब्रिटिश समाज में बहुत बड़ा योगदान हैं और मुझे यकीन है कि पूरा सदन ये चाहता है कि भारत के साथ ब्रिटेन के संबंध आगे भी ऐसे ही बढ़ते रहें।

थेरेसा का ये बयान संसद के वेस्टमिंस्टर हॉल में सांसदों के बीच 13 अप्रैल, 1919 के नरसंहार के लिए औपचारिक माफी के मुद्दे पर की गई बहस के बाद आया है। कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने इस मुद्दे को बहस के लिए टेबल पर रखा था और इसे शर्मनाक बताते हुए ब्रिटिश सरकार से माफी मांगने के लिए कहा था।

 

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