दैनिक भास्कर हिंदी: यशवंत सिन्हा बोले- चुनाव जीतने से सरकार की गलतियां माफ नहीं होतीं

September 29th, 2017

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीजेपी के कद्दावर नेता यशवंत सिन्हा ने देश की खस्ता आर्थिक नीतियों को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए थे। एक अंग्रेजी अखबार में दिए लेख के बाद गुरुवार को यशवंत सिन्हा खुलकर मीडिया के सामने आए और सरकार पर अपने हमले को तेज करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। सिन्हा ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से अर्थव्यस्था में लगातार गिरावट का दौर जारी है और इसके लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि 40 महीने सरकार में रहने के बाद हम पिछली सरकारों पर दोष नहीं डाल सकते। सिन्हा ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल की आर्थिक समझ को लेकर भी तंज कसा। यही नहीं, सिन्हा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक साल से मिलने का समय नहीं दिया है। 

अब 'आज तक' को दिए इंटरव्यू में सिन्हा ने नोटबंदी के बाद भी यूपी चुनाव में बीजेपी की जीत को लेकर कहा, 'यदि कोई चुनाव जीत जाता है तो उसकी सारी गड़बड़ियां नहीं भूल सकते। चुनाव जीतना एक बात है और देश चलाना दूसरी बात है। पीएम भी कहते हैं कि दल से ऊपर देश है और मुझे लगेगा कि देश के बारे में कुछ बोलना है तो मैं दल से ऊपर उठकर बोलूंगा।'

यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार एक के बाद एक झटके देती रही जिससे अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है और बीते 6 महीने से लगातार विकास दर में गिरावट देखी जा रही है। यशवंत सिन्हा ने कहा, 'सरकार ने पहला झटका नोटबंदी से दिया, अभी उससे लोग उबर भी नहीं पाए थे, कि इतने में जीएसटी का झटका दे दिया।’

मोदी सरकार पर सवाल दागते हुए यशवंत ने पूछा, 'कौन सा पहाड़ टूट जाता अगर जीएसटी,1 जुलाई के बजाए एक अक्टूबर से लागू होता। जिससे नोटबंदी के झटके से लोग उबर जाते तो जीएसटी का असर उतना नहीं होता।' हालांकि, यशवंत सिन्हा ने ये भी कहा कि वो इस वक़्त जीएसटी के डिज़ाइन और टैक्स दर पर बात नहीं कर रहे हैं।

बैंकों के 8 लाख करोड़ रुपये फंसे

बैंकों के फंसे कर्जों पर चिंता जताते हुए सिन्हा ने कहा कि बैंकों के 8 लाख करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। एनपीए की वजह से बैंकों ने ऋण देना बंद कर दिया, जिससे प्राइवेट इन्वेस्टमेंट नहीं हो रहा। सिन्हा ने कहा, 'एनपीए को काबू किये जाने की जरूरत है लेकिन अभी तक सरकार ने इस दिशा में कुछ खास नहीं किया है। 40 बड़ी कंपनियों के खिलाफ दिवालियापन की प्रक्रिया चल रही है। बैंकों की हालत में सुधार का इंतजार था जिसका अब भी इंतजार है।' 

जीएसटी का सबसे ज्यादा समर्थन मैंने किया है

सिन्हा ने कहा, 'जीएसटी का अगर किसी ने सबसे सबसे ज्यादा समर्थन किया तो वह मैं था, लेकन उसे जिस तरह लागू किया गया उससे चीजें गड़बड़ हुईं। नोटबंदी के झटके के बाद जीएसटी के तौर पर एक और झटका दे दिया गया। हमने 1 अक्टूबर को लागू करने को कहा था। वैसे भी 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष में लागू किया जा सकता था। जीएसटीएन फेल हो रहा है। परेशानियां बढ़ रही हैं।'

राजनाथ और पीयूष गोयल मुझसे ज्यादा अर्थशास्त्र समझते हैं

यशवंत सिन्हा ने केंद्रीय मंत्रियों द्वारा अपनी आलोचना पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, 'मैं हो सकता है कि उतना अर्थशास्त्र नहीं जानता हूं जितना केंद्र के कुछ मंत्रियों को पता है। हो सकता है कि राजनाथ और पीयूष गोयल मुझसे ज्यादा अर्थशास्त्र समझते हैं, लेकिन मैं इस विचार के साथ नहीं हूं।' 

एक दम से कुछ भी कैशलेस नहीं होता है

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैश आधारित बताते हुए सिन्हा ने कहा कि देश को जबरदस्ती कैशलेस नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा, 'कैशलेस अच्छी चीज है लेकिन दुनिया के सबसे विकसित देश में भी कैश और कैशलेस का एक निश्चित अनुपात है कैशलेस में बुराई नहीं है लेकिन सब कुछ अचानक कैशलेस हो जाए। तो भारत में दिक्कत आएगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था कैश आधारित है जोर-जबरदस्ती से देश कैशलेस नहीं होगा।'

एक न्यूज चैनल से बातचीत में यशवंत सिन्हा ने कहा, 'मैंने सालभर पहले पीएम मोदी से मिलने के लिए समय मांगा था। वह मुझसे नहीं मिले। क्या मुझे उनके घर के आगे धरना देना चाहिए। सरकार और पार्टी में हमारी बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है।'