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किसान एमएसपी से कम भाव पर कपास बेचने को मजबूर

October 29th, 2019 14:40 IST
किसान एमएसपी से कम भाव पर कपास बेचने को मजबूर

हाईलाइट

  • किसान एमएसपी से कम भाव पर कपास बेचने को मजबूर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। किसानों के लिए सफेद सोना कहलाने वाली फसल कपास इस बार उनके लिए सफेद सोना साबित नहीं होने जा रही है, क्योंकि किसान सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम भाव पर कपास बेचने को मजबूर हैं। किसानों को कपास का भाव इस समय 3,300-5,200 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने चालू कपास सीजन 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए लंबे रेशे वाले कपास का एमएसपी 5,550 रुपये प्रति क्विंटल और मध्यम रेशे के कपास का 5,255 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

हालांकि सरकारी एजेंसी भारतीय कपास निगम लिमिटेड (सीसीआई) ने एक अक्टूबर से सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों से एमएसपी पर कपास खरीदने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन अब तक सीसीआई की खरीद 15,000 गांठ (एक गांठ में 170 किलो) भी नहीं हो पाई है, जबकि मंडियों में कपास की नई फसल की आवक 12-15 लाख गांठ हो चुकी है।

सरकारी खरीद सुस्त होने के संबंध में पूछे जाने पर सीसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि कपास की नई फसल में नमी ज्यादा होने के कारण खरीद कम हो रही है। अब तक कितनी खरीद हो पाई है, इस संबंध में हालांकि उन्होंने सही आंकड़ा नहीं बताया, लेकिन एक अनुमान के तौर पर बताया कि 15,000 गांठ से कम ही खरीद हो पाई है।

सीसीआई 12 फीसदी से ज्यादा नमी होने पर कपास नहीं खरीदती है, जबकि बाजार सूत्रों ने बताया कि इस समय जो कपास की आवक हो रही है उसमें 12-30 फीसदी तक नमी पाई जाती है। मुंबई के कारोबारी अरुण शेखसरिया ने भी बताया कि सीसीआई ने नमी का जो मानक तय किया, उससे अधिक नमी होने के कारण कपास की खरीद सुस्त है। उन्होंने कहा कि कपास उत्पादक क्षेत्रों में बारिश होने के कारण नई फसल में नमी ज्यादा है, जिसके कारण सीसीआई की खरीद कम हो रही है, हालांकि मंडियों में जो फसल आ रही है वह बिक रही है।

शेखसरिया ने आईएएनएस को बताया कि बारिश के कारण कपास की आवक पिछले साल से कम हो रही है, पिछले साल अक्टूबर तक 26-28 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी थी, मगर इस साल अब तक 12-15 लाख गांठ ही हुई है। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण फसल खराब भी हुई है और क्वालिटी खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि क्वालिटी खराब होने से देश से कॉटन निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।मुंबई के कॉटन बाजार विश्लेषक गिरीश काबरा ने बताया कि कारोबारी अभी जो कपास खरीद रहे हैं, उसमें ज्यादातर सौदे काफी पहले हो चुके थे।उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में पैसों की जरूरत होने के कारण किसान कम भाव पर कपास बेचने को मजबूर हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।