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परांठा रोटी नहीं है, इसलिए लगेगा 18 प्रतिशत जीएसटी: एएआर

June 13th, 2020 08:40 IST
परांठा रोटी नहीं है, इसलिए लगेगा 18 प्रतिशत जीएसटी: एएआर

हाईलाइट

  • उपभोग के लिए तैयार परांठा, रोटी नहीं है
  • परांठा 2016 शीर्षक के तहत आता है। यह न तो खाखरा है, न ही सादी चपाती या रोटी
  • इसके अलावा ये आम उपभोग के और आवश्यक प्रकृति के उत्पाद भी नहीं है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उपभोग के लिए तैयार परांठा, रोटी नहीं है। खाने से पहले इसे और प्रोसेस करने की जरूरत होती है, ऐसे में इसपर 18 प्रतिशत की दर से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगेगा। अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (एएआर) ने यह व्यवस्था दी है। बेंगलुरु की कंपनी आईडी फ्रेश फूड्स ने एएआर की कर्नाटक पीठ के समक्ष आवेदन कर पूछा था कि क्या पूर्ण गेहूं का परांठा और मालाबार परांठा अध्याय 1905 वर्गीकरण के तहत आता है और इसपर 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। 

आवेदन करने वाली आईडी फ्रेश फूड्स खाद्य उत्पाद कंपनी है। यह रेडी-टु-कुक उत्पाद मसलन इडली, डोसा, परांठा और चपाती बेचती है। एएआर ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि सीमा शुल्क के शुल्क कानून या जीएसटी शुल्क में परांठे को लेकर कोई विशिष्ट प्रविष्टि नहीं है। एएआर ने कहा कि 5 प्रतिशत की जीएसटी दर उन उत्पादों पर लागू होगी जो 1905 या 2016 के शीर्षक के तहत आते हैं। ऐसे उत्पाद खाखरा, सादी चपाती और रोटी हैं। 

परांठा 2016 शीर्षक के तहत आता है। यह न तो खाखरा है, न ही सादी चपाती या रोटी। एएआर ने कहा कि खाखरा, सादी चपाती और रोटी पूरी तरह तैयार सामग्री है। इन्हें उपभोग के लिए और तैयार करने की जरूरत नहीं होती। वहीं परांठा या मालाबार परांठा इन उत्पादों से अलग है। इसके अलावा ये आम उपभोग के और आवश्यक प्रकृति के उत्पाद भी नहीं है। 

मानव उपभोग के लिए इनका और प्रसंस्करण करने या तैयार करने की जरूरत होती है। एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ भागीदार राजन मोहन ने कहा कि इन उत्पादों में कर का अंतर 13 प्रतिशत का है जिसकी वजह से रोटी और परांठे के वर्गीकरण को लेकर विवाद पैदा हुआ है। जमीनी वास्तविकता यह है कि आम भारतीय भाषा में इन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।