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Amravati News: अमरावती में बुरे हैं हालात , अप्रैल-मई की भीषण गर्मी की सता रही चिंता
Amravati News ग्रीष्म काल के आरंभ से ही विदर्भ के नंदनवन चिखलदरा में ज़ल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जहां 1 मार्च से ही महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण द्वारा एक दिन बाद जलापूर्ति की जा रही है। ऐसी स्थिति में यहां के नागरिकों की आवश्यकता तो पूरी हो रही है, लेकिन आने वाले चैत्र माह में यहां भक्तों का मेला लगता है। जिसमें केवल मेलघाट के ही नहीं तो पड़ोसी राज्यों के भक्त भी अपनी कुलदैवत स्थानीय श्री देवी मंदिर (देवी प्वाइंट) चिखलदरा पहुंचते है। जहां पूजा अर्चना के बाद यहां बलि देने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है। जिसके लिए उन्हें रोजाना हजारों लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन चिखलदरा की अप्राकृतिक जल किल्लत के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसके लिए सभी प्रशासनिक विभाग इसे प्राकृतिक आपत्ति बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते है।
बिजली बिल बचाने आमझिरी से नहीं करते जलापूर्ति : पर्यटन नगरी को भीषण जल संकट से बचाने के लिए शुरुआती समय में चिखलदारा के मुख्य प्राकृतिक जलस्रोत आमझिरी से सप्लाई किया जाना चाहिए। जिससे यहां के तालाबों का पानी ग्रीष्म काल के अंतिम समय के लिए बचा रहे, लेकिन बताया जाता है कि आमझिरी से पंप करने में बिजली का बिल अधिक आता है। यह बिजली बिल बचाने के लिए ठेकेदार द्वारा चिखलदरा के शक्कर तालाब एवं काला पानी से ज्यादा पानी पंप किया जाता है। जिससे चैत्र माह में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पानी की बूंद के लिए भी तरसना पड़ता है। जिससे मांग की जा रही है कि इन तालाबों का पानी बचाकर पहले आमझिरी से सप्लाई की जाए। ताकि आने वाले समय में देवी भक्तों के लिए पानी बचा रहे।
हाहाकार : 43 में से 8 गांवों में टैंकर से जलापूर्ति : जिले में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए प्रस्तावित करोड़ों रुपए की नई जल वितरण योजनाएं अभी तक अधर में ही लटकी रहने से जिले के 43 से अधिक गांवों में भीषण जलसंकट गहराया है। वर्तमान में जिले के सावंगी मग्रापुर (चांदुर रेलवे) और चिखलदरा तहसील क्षेत्र के आकि, खड़ीमल, मोचा और अन्य 3 ऐसे 8 गांवों में 8 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति कर नागरिकों की प्यास बुझाई जा रही है। आगामी दिनों में टैंकर से जलापूर्ति होने वाले गांवों का आंकड़ा 18 से पार जाने की संभावना हैं।
इन संबंधित गांवों में जल जीवन मिशन की शुरू योजनाओं का काम विगत 5 वर्षों में 70 प्रतिशत से आगे ही नहीं बढ़ पाया है। जिससे इस वर्ष भी इन गांवों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है। ग्रीष्मकाल की आहत से ही जिले में जलस्रोत सूख रहे हैं। कई गांव सूखे का सामना कर रहे हैं। इसलिए जिला परिषद ने हर साल की तर्ज पर इस वर्ष भी अस्थायी उपाय के तौर पर 45 अलग-अलग कुओं का अधिग्रहण किया है। जबकि जिले के 14 गांवों में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति का नियोजन किया है। वर्तमान में जिन कुल 45 निजी कुओं का अधिग्रहण किया गया है, जिनमें अमरावती तहसील क्षेत्र में 7, भातकुली में 1, चांदुर रेलवे में 3, नांदगांव खंडेश्वर में 16, अचलपुर में 3, मोर्शी में 11 तथा वरुड़ और चिखलदरा तहसील क्षेत्र में दो-दो कुएं शामिल हैं।
Created On :   21 March 2025 2:12 PM IST
















