Amravati News: गांव वीरान, 100 में से 70 घरों में लगे ताले, छुट्टियों में सिर्फ बुजुर्ग बचेंगे

गांव वीरान,  100 में से 70 घरों में लगे ताले, छुट्टियों में सिर्फ बुजुर्ग बचेंगे
  • नलों से नहीं आता है पानी, एक किमी दूर कुओं से लाना पड़ता है
  • खटकाली गांव में रोजगार भी नहीं, लोगों ने किया पलायन

Amravati News विदर्भ के नंदनवन व जिले की शान मेलघाट वासियों की त्रासदियां भी इतनी विकट हैं कि लाख प्रयासों के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा। दुर्गम क्षेत्र में आजादी के बाद से अब तक के वर्षों में पीने के पानी तक की व्यवस्था के नाम पर सिर्फ नल लगे हैं, लेकिन उनमें से पानी कभी नहीं आया। हाल यह है कि अब स्वयं नंदनवन निवासी ही यहां से पलायन करने पर विवश है।

इस क्रम में सतपुड़ा पर्वतों में बसा खटकाली गांव आज लगभग वीरान हो चुका है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस गांव में अब सन्नाटा पसरा है। रोजगार के अभाव में 70 से 80 प्रतिशत परिवार गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं। फिलहाल कुछ बच्चे पढ़ाई के कारण गांव में रुके हैं, लेकिन स्कूलों की छुट्टियों के बाद वे भी अपने परिवार के साथ पलायन करेंगे। ऐसे में गर्मी के दिनों में गांव में केवल बुजुर्ग और कुछ किसान ही रह जाएंगे।

करीब 450 की आबादी वाले इस गांव में फिलहाल केवल 30 से 40 प्रतिशत लोग ही रह गए हैं। 100 से अधिक घरों में से लगभग 60 से 70 घर बंद पड़े हैं। अधिकांश ग्रामीण अकोट क्षेत्र की ईंट भट्टियों पर काम करने के लिए बाहर चले गए हैं। गांव में बिजली सुविधा होने के बावजूद पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है। नल योजना होने के बावजूद पानी नहीं आता, जिससे ग्रामीणों को आधा से एक किलोमीटर दूर स्थित कुओं से पानी लाना पड़ता है। नई कुएं का निर्माण होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

पहले आदिवासी परिवार जंगल में खेती और पशुपालन कर जीविका चलाते थे, लेकिन अब जंगल में खेती पर रोक लगने से रोजगार के साधन खत्म हो गए हैं। केवल कुछ युवाओं को ही प्रकल्प में अस्थायी काम मिल पा रहा है। होली जैसे प्रमुख त्योहार पर गांव में कुछ दिनों के लिए रौनक रहती है, जब बाहर गए लोग वापस आते हैं। लेकिन त्योहार खत्म होते ही गांव फिर से सूना हो जाता है। प्राकृतिक संपन्नता के बावजूद बुनियादी सुविधाओं और रोजगार की कमी ने इस गांव को उजड़ने की कगार पर ला खड़ा किया है।

"ऐसे' गावों में कुछ भी नहीं कर सकते : मेलघाट क्षेत्र के कुछ दुर्गम गांव ऐसे भी हैं जहां पानी की आपूर्ति की व्यवस्था हेतु कुछ भी नहीं किया जा सकता है। फिर भी कुछ गांवो में वैकल्पिक संभावनाओं पर काम शुरू है। पलायन रोकने के लिए भी प्रयास किये जा रहे हैं। - संजीता मोहापात्र, मुख्य कार्यकारी अधिकारी


Created On :   25 March 2026 2:36 PM IST

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