Bhandara News: भंडारा जिले के सभी 124 रेत घाटों से उत्खनन पर रोक बरकरार

भंडारा जिले के सभी 124 रेत घाटों से उत्खनन पर रोक बरकरार
  • 24 घाटों की मंजूरी को लेकर न्यायालय ने लगायी फटकार
  • 10 मार्च को अगली सुनवाई

Bhandara News राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) पुणे ने भंडारा जिले के सभी 124 रेत घाटों से रेत उत्खनन पर लगाई गई रोक को बरकरार रखा है। 5 फरवरी को लगाई गई अंतरिम रोक के बाद 25 फरवरी को हुई सुनवाई में न्यायाधिकरण ने जिला प्रशासन के जवाब पर असंतोष जताते हुए प्रतिबंध जारी रखने के आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई अब 10 मार्च को होगी। सुनवाई से पहले ही 9 फरवरी को जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा 24 घाटों से रेत उत्खनन की अनुमति जारी की गई थी। इस पर एनजीटी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन बताया और प्रशासन को फटकार लगाई। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के किसी भी घाट से रेत उत्खनन नहीं किया जाएगा।

पर्यावरण प्रेमियों की याचिका पर कार्रवाई : सूत्रों के अनुसार, कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने एनजीटी में याचिका दायर कर भंडारा जिले के रेत उत्खनन प्लान पर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिले में उपलब्ध रेत की वास्तविक मात्रा से कई गुना अधिक उत्खनन की अनुमति दी गई है, जिससे वैनगंगा नदी के सूखने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि जिला प्रशासन ने क्षमता से अधिक उत्खनन की मंजूरी देकर पर्यावरणीय संतुलन को खतरे में डाला है। इसी संदर्भ में एनजीटी ने जिलाधिकारी और जिला खनिकर्म अधिकारी से 25 फरवरी को जवाब तलब किया था।हालांकि, प्रशासन के जवाब से न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ और 24 घाटों को दी गई अनुमति पर नाराजगी जताते हुए पूरे जिले में उत्खनन रोकने का आदेश दिया।

रेत घाट मालिक का पक्ष सुनने से न्यायालय ने किया इनकार : सूत्रों के मुताबिक, उत्खनन पर लगी रोक के खिलाफ गुरुवार को घाट मालिक की ओर से वकील न्यायालय में उपस्थित हुआ। घाट मालिकों ने रोक के कारण लगभग 92 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया। लेकिन न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए घाट मालिक का पक्ष सुनने से इनकार कर दिया और नुकसान से संबंधित मामले के लिए जिलाधिकारी कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी।

5 लाख ब्रास की जगह 15 लाख ब्रास उत्खनन की अनुमति : इस वर्ष जिलाधिकारी कार्यालय ने 15 लाख ब्रास रेत उत्खनन की अनुमति दी है, जबकि पूर्व में केवल 4 से 5 लाख ब्रास तक ही अनुमति दी जाती थी। इतनी अधिक मात्रा में उत्खनन से जलस्रोतों के समाप्त होने और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए एनजीटी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। अब सबकी निगाहें 10 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जिला प्रशासन को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा।


Created On :   27 Feb 2026 1:52 PM IST

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