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Bhopal News: भोपाल मेमोरियल अस्पताल में अनियमितता का आरोप, कांग्रेस ने की जांच की मांग

डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश कांग्रेस ने भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएचएमआरसी) में मरीजों के इलाज, आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, अस्पताल की व्यवस्थाओं और महंगी चिकित्सा मशीनों के उपयोग को लेकर जांच की मांग की। मप्र कांग्रेस के महासचिव अमित शर्मा शुक्रवार को पत्रकार वार्ता कर कहा बीएचएमआरसी में अनियमितता की कई शिकायतें सामने आई हैं। शिकायत में डॉ अमन चतुर्वेदी को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके विरुद्ध शिकायतों के बाद उन्हें अस्पताल से हटाया गया। साथ ही उन पर शराब और नशीले पदार्थों के सेवन की स्थिति में मरीजों का ऑपरेशन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल में आउटसोर्स एजेंसी के जरिए कर्मचारियों की भर्ती की जाती है। भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं होती हैं। शिकायत में एजेंसी से जुड़े दो सुपरवाइजर बसंत अवस्थी और सैयद असरफ अली की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर 50 हजार से लेकर 2 लाख तक की रकम ली जाती है। कई आउटसोर्स कर्मचारियों से 6–8 महीने अथवा लगभग एक वर्ष तक काम कराने के बाद उन्हें इधर-उधर स्थानांतरित कर दिया जाता है। कुछ को सीधे सेवा से हटा दिया जाता है।
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वहीं, लंबे समय से अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य और रोजगार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल में 18–18 और 20–20 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को भी मनमाने तरीके से हटाया गया है। दूसरी ओर नई भर्ती किए गए आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से दबाव और दादागिरी किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के टीए-डीए, बोनस, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे वैधानिक सेवा संबंधी लाभों को लेकर करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला बनता है।
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खातों की स्वतंत्र ऑडिट व जांच हो
कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मेहनत की कमाई और वैधानिक अधिकारों का भुगतान रोका जा रहा है। संबंधित एजेंसियों और अस्पताल प्रशासन के खातों की स्वतंत्र ऑडिट एवं जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। अस्पताल में करोड़ों रुपये की एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों का उपयोग नहीं किया जाता। आरोप है कि मशीनें धूल खा रही हैं और मरीजों को जांच के लिए बाहर रेफर किया जाता है। मरीजों को बाहर रेफर कर उनसे महंगी जांच और उपचार कराया जाता है। कमीशन का खेल चल रहा है। शिकायत में अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों का नाम लिया गया है। उनकी जांच की जानी चाहिए। अस्पताल में व्यवस्था मनमाने तरीके से संचालित की जा रही हैं और मरीजों को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित लोगों के लिए स्थापित अस्पताल में ही गैस पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए परेशान किए जाने और उन्हें पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दिए जाने की शिकायत बेहद गंभीर है।
आरोप है कि आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि गैस पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि अस्पताल की भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्स एजेंसियों के अनुबंध, कर्मचारियों के भुगतान, मशीनों के उपयोग, मरीजों के रेफरल, आयुष्मान मरीजों की भर्ती, गैस पीड़ितों के उपचार और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए।
Created On :   11 Oct 2026 1:37 AM IST













