Bhopal News: बंडा जहरीली शराब कांड को लेकर पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, श्वेत पत्र जारी करने की मांग

बंडा जहरीली शराब कांड को लेकर पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, श्वेत पत्र जारी करने की मांग
मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे और बताए की गुजरात और मुरैना में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सरकार ने घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या एक्शन प्लान बनाए थे। उन्होंने पत्र में लिखा कि सागर जिले की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। मैं स्वयं पीड़ित परिवारों के बीच गया हूं। जिन घरों में कल तक जीवन था, आज वहां मातम है। इन परिवारों का दर्द सरकार के किसी आंकड़े से नहीं समझा जा सकता। जहरीली शराब से मौत अब कोई असाधारण घटना नहीं रह गई है। हर बार हादसा होता है, कुछ अधिकारियों के तबादले या निलंबन होते हैं और सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है। यह परंपरा अब बंद होनी चाहिए। जब अवैध शराब के कारोबार की सूचनाएं और शिकायतें मौजूद थीं, तब समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। मौतों के बाद कार्रवाई करने वाला तंत्र मौतों से पहले कहां था। प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। एसी केबिनों में बैठकर कागजी नीतियां बनाने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। जमीन पर मॉनिटरिंग और प्रभावी सुपरविजन किसकी जिम्मेदारी थी। सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना होगा। विभागीय स्तर पर जांच और कार्रवाई के बीच विरोधाभास है। पहले कार्रवाई का आदेश और फिर उसमें बदलाव जैसे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। किसके आदेश पर क्या फैसला हुआ और क्यों हुआ, सरकार यह पूरा सच सार्वजनिक करे।

अंतरराज्यीय अवैध शराब कारोबार से जुड़े हैं तार

पटवारी ने पत्र में लिखा कि सागर का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित है या इसके तार अंतरराज्यीय अवैध शराब कारोबार से जुड़े हैं, इसकी भी तह तक जाना होगा। यदि ललितपुर से सागर तक नकली शराब पहुंची, तो मप्र की सीमा के भीतर उसे रोकने वाला तंत्र क्या कर रहा था। गुजरात की जहरीली शराब त्रासदी और उज्जैन से सामने आए कथित कनेक्शन पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। यदि किसी डिस्टलरी से अवैध शराब के उत्पादन अथवा आपूर्ति की कड़ी जुड़ती है, तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। डिस्टलरी से लेकर गोदाम, लाइसेंसी दुकान और गांव के अंतिम विक्रेता तक पूरी सप्लाई चेन की जांच हो। यदि किसी भाजपा नेता या उससे जुड़े व्यक्ति की भूमिका पाई जाती है तो राजनीतिक संरक्षण के नाम पर उसे बचाया नहीं जाना चाहिए।

Created On :   9 Sept 2026 10:26 PM IST

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