MP News: यूको बैंक और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में घोटाला, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, डीजीएम ने की थी शिकायत

यूको बैंक और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में घोटाला, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, डीजीएम ने की थी शिकायत

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोपाल के हबीबगंज स्थित यूको बैंक शाखा और द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में घोटाला सामने आने के बाद सीबीआई भोपाल ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु कर दी। डीजीएम जोनल हेड यूको बैंक भोपाल लोकेश कुमार ने सीबीआई को शिकायत की थी जिसमें यूको बैंक हबीबगंज ब्रांच भोपाल के बैंक अधिकारियों पर प्राइवेट लोगों के साथ मिलीभगत करके गलत काम करने का आरोप लगाया गया था।

1 जनवरी 2020 से 31 अक्टूबर 2021 के दौरान, बैंक में अलग-अलग लोगों के नाम पर 118 फर्जी बैंक अकाउंट खोले गए और सरकार द्वारा दी गई 99.48 लाख रुपये की स्कॉलरशिप इन अकाउंट में जमा की गई, जिसे अनजान लोगों ने गलत तरीके से हड़प लिया। जांच से पता चला कि बैंक में, एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज भोपाल के एमबीए स्टूडेंट्स के नाम पर उनकी जानकारी और सहमति के बिना 118 सेविंग बैंक अकाउंट खोले गए और उसके बाद सरकार द्वारा दी गई स्कॉलरशिप की रकम इन बैंक अकाउंट में जमा की गई, जिसे आरोपियों ने बेईमानी और धोखाधड़ी से हड़प लिया।

जांच में पहली नजर में एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज भोपाल से जुड़े विनय मल्होत्रा, आदित्य मल्होत्रा, मनोज जैन, राम सिंह वर्मा और विनेश मेश्राम की इन बैंक अकाउंट खोलने, इन बैंक अकाउंट से अपने मोबाइल नंबर लिंक करने, एटीएम कार्ड लेने और धोखाधड़ी से स्कॉलरशिप की रकम निकालने में भूमिका सामने आई। जांच में आगे पता चला कि इन अकाउंट्स के अकाउंट ओपनिंग फॉर्म में बिना जरुरी केवायसी वेरिफिकेशन के नकली साइन और गलत जानकारी भरी गई थी।

नकली निकले दस्तावेज

एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज से कथित तौर पर जारी बोनाफाइड सर्टिफिकेट को सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया गया था, जो जांच में नकली पाए गए। फर्जी एटीएम कार्ड असली अकाउंट होल्डर्स से बिना लिखित इजाजत के राम सिंह नाम के एक ही आदमी को जारी और डिलीवर किए गए। आरोपी कॉलेज अधिकारियों और उनके साथियों के मोबाइल नंबर धोखे से स्टूडेंट्स के अकाउंट से लिंक कर दिए गए, जिससे ओटीपी मिल गए और स्कॉलरशिप की रकम क्रेडिट होने के उसी दिन तुरंत निकाल ली गई। श्रीमती प्रेमा वर्मा, जो उस समय यूको बैंक, भोपाल की हबीबगंज ब्रांच की सीनियर मैनेजर थीं, को अकाउंट खोलने, केवायसी कम्प्लायंस, सिस्टम वेरिफिकेशन और एटीएम जारी करने का काम सौंपा गया था, उन्होंने कॉलेज अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके, बैंकिंग नियमों का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए, क्रिमिनल साजिश, जालसाजी, धोखाधड़ी और क्रिमिनल मिसकंडक्ट के अपराध किए।

4.30 करोड़ का डैमेज क्लेम लिया

डिप्टी जनरल मैनेजर भोपाल रीजन ऑफिस द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मयंक कुमार झा ने सीबीआई को शिकायत की कि ऑटो टाई-अप हब (450600), ग्वालियर नॉन सूट हब (459005) और भिंड बीओ (450607) के जरिए सेटल किए गए 411 इंश्योरेंस क्लेम में 4.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की संदिग्ध गतिविधियां की गई हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अप्रैल 2021 से अक्टूबर 2024 के दौरान, गाड़ी मालिकों, ड्राइवरों, गैरेज मालिकों, सर्वेयर, स्पेयर पार्ट दुकान मालिकों और अनजान सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से उन्हीं गाडिय़ों के लिए 4.30 करोड़ रुपये के 411 मोटर ओन डैमेज क्लेम धोखाधड़ी से फाइल किए गए और सेटल किए गए।

धोखाधड़ी के कामों में इन लोगों का रोल सामने आये

अवधेश परमार निवासी सिद्धेश्वर नगर, नदी पार ताल मोरार, सिटी ग्वालियर ने 5 गाडिय़ों के लिए 47 लाख 26 हजार 540 रुपये के 31 क्लेम फाइल किए और सेटल करवाए। क्लेम फ्रॉड थे। शैलेंद्र सिंह परमार ने 2 गाडिय़ों के लिए 24 लाख 62 हजार 71 रुपये के 16 क्लेम फाइल किए और सेटल करवाए, जिनमें गड़बडिय़ां थीं। मनराज प्रजापति निवासी नर सिंह नगर के पास, चार शहर का नाका, ग्वालियर ने 1 गाड़ी के लिए 8 लाख 15 हजार 358 रुपये के 8 क्लेम फाइल किए और सेटल करवाए, जिनमें गड़बडिय़ां थीं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि धोखाधड़ी वाले/बोगस क्लेम ज़्यादातर ऑटो-टाई अप पॉलिसी जैसे मारुति (ऑफिस कोड - 980000)/ हुंडई (ऑफिस कोड - 113000/800000) और ऑनलाइन पोर्टल पॉलिसी पर किए गए थे, जो कि इंश्योर इंश्योरेंस ब्रोकर (ऑफिस कोड - 170900), पॉलिसी बाजार इंश्योरेंस ब्रोकर (ऑफिस कोड - 350300) जैसे ब्रोकर के जरिए जारी की गई थीं। हालांकि, कुछ क्लेम लोकल ऑफिस के जरिए जारी की गई पॉलिसी में भी किए गए थे।

Created On :   3 July 2026 12:16 AM IST

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